हरियाणा के 22 जिलों और 38 उप-मंडलों में लगी राष्ट्रीय लोक अदालत, 6,75,000 से ज्यादा मामलों का हुआ निपटारा

 
हरियाणा के 22 जिलों और 38 उप-मंडलों में लगी राष्ट्रीय लोक अदालत, 6,75,000 से ज्यादा मामलों का हुआ निपटारा

 

“मुकदमेबाजी से सुलह तक: राष्ट्रीय लोक अदालत में वैवाहिक विवाद का सुखद अंत ”

चंडीगढ़,12 सितम्बर। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय न्यायाधीशन्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी एवं कार्यकारी अध्यक्ष, हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (हालसा) के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में पूरे हरियाणा राज्य में इस वर्ष की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की गई। यह राष्ट्रीय लोक अदालत हरियाणा के सभी 22 जिलों और 38 उप-मंडलों में आयोजित की गई। शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत को अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली और इसने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जिसमें सुलझाए गए मामलों की संख्या अब तक की सबसे अधिक रही। 6,75,000 से ज्यादा मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया।

          

    लोक अदालत के माध्यम से लोगों में बदलाव लाने की क्षमता का दिल को छू लेने वाला उदाहरण जिला हिसार से सामने आया, जहाँ परिवार न्यायालय में पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद को आपसी सहमति से शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाया गया। लोक अदालत पीठ के अथक प्रयास और परामर्श के जरिए, दोनों पक्षों को अपने मतभेद सुलझाने और रिश्ते में फिर से तालमेल बिठाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। एक भावुक पल में, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और आपसी समझ और तालमेल के साथ अपना पारिवारिक जीवन फिर से शुरू करने की इच्छा जताई। यह समझौता दिखाता है कि राष्ट्रीय लोक अदालत सिर्फ मामलों को निपटाने से कहीं आगे बढ़कर, बातचीत, परामर्श, सुलह और आपसी सहमति के जरिए रिश्तों को फिर से जोड़ सकती है, परिवारों को बचा सकती है और मुकदमा लड़ने वालों की जिंदगी में नई उम्मीद और शांति ला सकती है।

    राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रति एक प्रतीकात्मक कदम के तौर पर एवं पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, न्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी ने पंचकूला में हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रशासनिक भवन में पौधारोपण किया।

    राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान, न्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी ने राज्य भर की कुछ लोक अदालत पीठों के साथ वर्चुअल माध्यम से बातचीत की और कार्यवाही का जायजा लिया। न्यायमूर्ति सेठी ने इस बात पर भी जोर दिया कि आपसी सहमति, सार्थक बातचीत, सुलह और समझौते के माध्यम से विवादों के सौहार्दपूर्ण निपटारे के लिए ईमानदारी के साथ ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।

 इसके बाद, न्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी ने पंचकूला की जिला न्यायालय का दौरा किया और व्यक्तिगत रूप से लोक अदालत पीठों का निरीक्षण किया, साथ ही उन्होंने वादकारियों से बातचीत की और लोक अदालत पीठों की कार्यवाही की समीक्षा की।

           राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों का बड़े पैमाने पर निपटारा, हालसा के कार्यकारी अध्यक्ष की मिली-जुली कोशिशों और लगातार मार्गदर्शन का नतीजा था। उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के अध्यक्षों एवं सचिवों को राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया, जिसमें सही मामलों की पहचान, लोक अदालत से पहले की बैठकें, हितधारकों के साथ असरदार तालमेल और ज्यादा से ज्यादा जन-जागरूकता अभियान आदि शामिल थे। राष्ट्रीय लोक अदालत से पहले न्यायमूर्ति सेठी ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के अध्यक्षों, सचिवों और अन्य न्यायिक अधिकारियों के साथ भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की तथा उनकी तैयारियों और प्रगति की समीक्षा की और उन्हें पूरी प्रतिबद्धता, कुशलता और समर्पण दिखाने और आपसी सहमति से समझौता कराने की हर मुमकिन कोशिश करने के लिए प्रेरित किया।

  राष्ट्रीय लोक अदालत (जिसमें लोक अदालत से पूर्व बैठकें भी शामिल थीं), में कई तरह के विवादों से जुड़े मामलों का बड़ी संख्या में निपटारा किया गया। वादकारियों के जबरदस्त उत्साह से पता चलता है कि विवादों को सुलझाने के वैकल्पिक और असरदार तरीके के तौर पर लोक अदालत के सिस्टम में लोगों का भरोसा बढ़ रहा है। लोक अदालत में हुए समझौतों से न सिर्फ वादकारियों का कीमती समय और मुकदमंेबाजी का खर्च बचा, बल्कि हरियाणा भर की अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम करने में भी काफी मदद मिली। राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान लगभग 78,44,79,92,903 रुपये की राशि का भुगतान एवं निपटारा किया गया।

     राष्ट्रीय लोक अदालत के कुशल आयोजन के लिए, राज्य भर में कुल 184 लोक अदालत पीठें बनाई गईं, ताकि मुकदमे से पहले और लंबित मामलों - जैसे कि सिविल विवाद, वैवाहिक मामले, मोटर दुर्घटना क्लेम के मामले, बैंक रिकवरी के मामले, एन0आई0 एक्ट के तहत चेक बाउंस के मामले, ट्रैफिक चालान और समझौता-योग्य अपराधिक मामलों - पर सुनवाई की जा सके।