हरियाणा में घटती कपास की खेती को लेकर किसान सभा ने जताई गहरी चिंता
आयात शुल्क हटाने के फैसले का विरोध
बैठक की अध्यक्षता AIKS के प्रदेश अध्यक्ष मास्टर बलबीर सिंह ने की। नेताओं ने केंद्र सरकार द्वारा कपास पर 11 प्रतिशत आयात शुल्क हटाने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे सस्ते विदेशी कपास के आयात को बढ़ावा मिलेगा और पहले से आर्थिक संकट झेल रहे कपास किसानों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
10 महीने के आंदोलन की जीत का स्वागत
AIKS के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंदरजीत सिंह ने कहा कि संगठन ने भिवानी और चरखी दादरी के किसानों की 10 महीने लंबी लड़ाई को बड़ी जीत बताया है। किसानों ने वर्ष 2023 की खरीफ फसलों के बीमा दावों के भुगतान के लिए संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों के दबाव के बाद 375 करोड़ रुपये के फसल नुकसान मुआवजे को मंजूरी दी है, लेकिन अब यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि राशि जल्द किसानों के खातों में पहुंचे।
MSP वृद्धि को बताया अपर्याप्त
किसान सभा ने हाल ही में घोषित खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को भी नाकाफी बताया। संगठन का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और MSP में मामूली बढ़ोतरी किसानों को वास्तविक राहत नहीं दे पाएगी।
स्मार्ट मीटर और अलग डिस्कॉम का विरोध
बैठक में हरियाणा सरकार द्वारा स्मार्ट बिजली मीटर लगाने और कृषि क्षेत्र के लिए अलग बिजली वितरण कंपनी (डिस्कॉम) बनाने के प्रस्ताव का भी विरोध किया गया। किसान नेताओं का आरोप है कि ये कदम बिजली क्षेत्र के निजीकरण की दिशा में बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने बिजली उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों के साथ मिलकर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी।
खाद की कमी और बढ़ती महंगाई पर चिंता
AIKS के प्रदेश महासचिव सुमित दलाल ने कहा कि संगठन ने "झज्जर टू घग्गर" अभियान के तहत आठ पंचायतें आयोजित की हैं, जिनमें हिसार-घग्गर मल्टीपर्पज ड्रेन की सफाई और रखरखाव की मांग उठाई गई। बैठक में डीजल, पेट्रोल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की भी आलोचना की गई। किसान नेताओं का कहना है कि ईंधन महंगा होने से खेती की लागत बढ़ेगी और आम लोगों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। संगठन ने बुवाई सीजन के दौरान खाद की कथित कमी पर भी चिंता जताई।
