TGT शिक्षकों को हाईकोर्ट से राहत, नौकरी पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश 

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने टीजीटी (अंग्रेजी) पद पर कार्यरत दो शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए उनकी सेवाओं पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। दोनों शिक्षक संशोधित परिणाम जारी होने के बाद चयन सूची से बाहर हो गए थे, जबकि वे करीब दो सालों से नौकरी कर रहे हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति मनीषा बत्रा की एकल पीठ ने पिंकी और एक अन्य शिक्षक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिकाकर्ताओं ने हरियाणा सरकार और अन्य संबंधित अधिकारियों को मामले में पक्षकार बनाया है।
 
TGT शिक्षकों को हाईकोर्ट से राहत, नौकरी पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश 
 

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने टीजीटी (अंग्रेजी) पद पर कार्यरत दो शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए उनकी सेवाओं पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। दोनों शिक्षक संशोधित परिणाम जारी होने के बाद चयन सूची से बाहर हो गए थे, जबकि वे करीब दो सालों से नौकरी कर रहे हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति मनीषा बत्रा की एकल पीठ ने पिंकी और एक अन्य शिक्षक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिकाकर्ताओं ने हरियाणा सरकार और अन्य संबंधित अधिकारियों को मामले में पक्षकार बनाया है।

 

याचिका में कहा गया है कि दोनों अभ्यर्थियों ने सामान्य वर्ग के तहत प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी-इंग्लिश) पद के लिए आवेदन किया था। वे सभी पात्रता शर्तों को पूरा करते थे और लिखित परीक्षा में 64.6 अंक प्राप्त कर चयनित हुए थे। इसके बाद उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किए गए और उन्होंने 29 जुलाई 2024 को अपनी सेवाएं ज्वाइन कर ली थीं। मामला तब विवादों में आया जब 28 मई को भर्ती का संशोधित परिणाम जारी किया गया। संशोधित अंतिम चयन सूची में संबंधित श्रेणी के अंतिम चयनित उम्मीदवार के भी 64.6 अंक पाए गए। ऐसे में आयु को आधार बनाकर याचिकाकर्ताओं को चयन क्षेत्र (सेलेक्शन जोन) से बाहर कर दिया गया।

 

याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत में दलील दी कि दोनों शिक्षक करीब दो वर्षों से विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में केवल उम्र में कम होने के आधार पर उन्हें चयन सूची से बाहर करना और नौकरी से हटाना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने अदालत से मांग की कि 27 जुलाई 2024 को घोषित मूल अंतिम चयन सूची के आधार पर उन्हें सेवा में बनाए रखा जाए और उनकी सेवाएं समाप्त न की जाएं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता जसबीर सिंह मोर ने तर्क दिया कि नियुक्ति और लंबे समय तक सेवा देने के बाद चयन सूची में बदलाव कर उन्हें बाहर करना मनमाना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम चयन सूची जारी होने के बाद उसे बदलना कानूनन उचित नहीं माना जा सकता।

 

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने कई न्यायिक निर्णयों का भी हवाला दिया। उन्होंने अदालत को बताया कि उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न मामलों में यह स्पष्ट किया है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम सूची में बदलाव कर नियुक्त उम्मीदवारों को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही मामले की अगली सुनवाई 15 जून को निर्धारित की गई है।

 

अंतरिम राहत देते हुए न्यायमूर्ति मनीषा बत्रा ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं की सेवाओं के संबंध में यथास्थिति बनाए रखी जाए। अदालत के इस आदेश से फिलहाल दोनों शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित हो गई है और वे अपने पद पर कार्य करते रहेंगे। अब सभी की नजर 15 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर रहेगी, जिसमें हाईकोर्ट इस भर्ती विवाद पर आगे की कार्रवाई और अंतिम निर्णय की दिशा तय करेगा।