हरियाणवी लोक संस्कृति और नगाड़ा वादन को मिलेगा बढ़ावा, कुरुक्षेत्र में शुक्रवार को आयोजित होगी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता

 
 हरियाणवी लोक संस्कृति और नगाड़ा वादन को मिलेगा बढ़ावा, कुरुक्षेत्र में शुक्रवार को आयोजित होगी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता

उप निदेशक डॉ. दीपिका ने कहा—पारंपरिक लोक कलाओं को संरक्षित कर युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता

प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले दल को मिलेंगे 75 हजार रुपये, दूसरे स्थान पर 65 हजार और तीसरे स्थान पर 55 हजार रुपये का पुरस्कार

झज्जर,

हरियाणा की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और लोक वाद्य यंत्रों की विरासत को संरक्षित करने तथा लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को कुरुक्षेत्र स्थित मल्टी आर्ट सेंटर में राज्य स्तरीय नगाड़ा (बंचारी) प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। प्रतियोगिता सुबह 10 बजे शुरू होगी। प्रदेश सरकार के कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले लोक कलाकारों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।
कला एवं सांस्कृतिक विभाग की उप निदेशक डॉ. दीपिका ने कहा कि हरियाणा की लोक कलाएं और पारंपरिक संगीत प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। नगाड़ा वादन जैसी पारंपरिक विधाएं हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसी प्रतियोगिताओं के माध्यम से पारंपरिक लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलता है और युवा पीढ़ी भी अपनी जड़ों, लोक परंपराओं तथा सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ती है।

प्रथम पुरस्कार विजेता दल को मिलेंगे 75 हजार रुपये
डॉ दीपिका ने बताया कि प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले दल को 75 हजार रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले दल को 65 हजार रुपये तथा तृतीय स्थान हासिल करने वाले दल को 55 हजार रुपये की नकद पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त पांच सांत्वना पुरस्कार भी दिए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक विजेता दल को 10 हजार रुपये की राशि मिलेगी। उन्होंने कहा कि पुरस्कारों के माध्यम से पारंपरिक लोक कलाओं से जुड़े कलाकारों का उत्साहवर्धन होगा और इस विधा को नई पहचान मिलेगी।

प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए निर्धारित नियमों का पालन जरूरी
उप निदेशक ने बताया कि प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी कलाकारों का हरियाणा का मूल निवासी होना अनिवार्य है। प्रतिभागियों को अपने साथ आधार कार्ड लाना होगा तथा प्रत्येक दल में 10 कलाकार होने चाहिए। प्रत्येक दल को अपनी प्रस्तुति के लिए तीन से पांच मिनट का समय दिया जाएगा। प्रस्तुतियां हरियाणवी पारंपरिक लोकगीतों, लोक संगीत और पारंपरिक रसिया गायन पर आधारित होनी चाहिए। फिल्मी धुनों पर आधारित प्रस्तुतियों को प्रतियोगिता में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

हरियाणवी पारंपरिक वेशभूषा में प्रस्तुति देना अनिवार्य
प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले कलाकारों को हरियाणवी पारंपरिक लोक परिधान में ही प्रस्तुति देनी होगी। कोई भी कलाकार केवल एक दल की ओर से ही भाग ले सकेगा। यदि कोई कलाकार एक से अधिक दलों के साथ प्रस्तुति देता पाया जाता है, तो संबंधित दल को प्रतियोगिता से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। प्रतिभागियों को यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता देय नहीं होगा। प्रतियोगिता के संबंध में निर्णायक मंडल का निर्णय अंतिम एवं सर्वमान्य होगा।
उप निदेशक ने लोक कलाकारों से आह्वान किया कि वे प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने वाली ऐसी प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग लें। उन्होंने कहा कि लोक कलाओं का संरक्षण केवल हमारी परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक हरियाणा की सांस्कृतिक पहचान पहुंचाने का भी महत्वपूर्ण प्रयास है।