हरियाणा का ड्रीम प्रोजेक्ट कागजों में कैद, हिसार IMC का काम अब भी सुस्त 

 हिसार: महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट के पास प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) परियोजना की धीमी प्रगति चिंता का विषय बनती जा रही है। राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम (NICDC) द्वारा अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) के तहत विकसित किए जा रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का उद्देश्य पश्चिमी हरियाणा को औद्योगिक और विनिर्माण हब के रूप में विकसित करना है, लेकिन मंजूरी मिलने के वर्षों बाद भी यह परियोजना योजना के चरण से आगे नहीं बढ़ पाई है।
 
हरियाणा का ड्रीम प्रोजेक्ट कागजों में कैद, हिसार IMC का काम अब भी सुस्त
हिसार: महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट के पास प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) परियोजना की धीमी प्रगति चिंता का विषय बनती जा रही है। राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम (NICDC) द्वारा अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) के तहत विकसित किए जा रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का उद्देश्य पश्चिमी हरियाणा को औद्योगिक और विनिर्माण हब के रूप में विकसित करना है, लेकिन मंजूरी मिलने के वर्षों बाद भी यह परियोजना योजना के चरण से आगे नहीं बढ़ पाई है।
 

सरकारी सूत्रों के अनुसार, देशभर में AKIC के तहत विकसित किए जा रहे 12 इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटीज में हिसार का IMC एक प्रमुख परियोजना है। इसे बड़े पैमाने पर घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए तैयार किया जा रहा है। हालांकि, जमीनी स्तर पर काम की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए करीब 2,988 एकड़ विवाद-मुक्त सरकारी जमीन पहले ही राज्य सरकार द्वारा हस्तांतरित की जा चुकी है। आमतौर पर औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण सबसे बड़ी चुनौती होती है, लेकिन हिसार को यह शुरुआती बढ़त पहले से हासिल है। इसके बावजूद अब तक सलाहकारों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है और इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) टेंडर भी जारी नहीं हुआ है, जिससे वास्तविक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

 

अधिकारियों का कहना है कि राजपुरा जैसे अन्य इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स में EPC स्तर का काम काफी आगे बढ़ चुका है, जबकि हिसार परियोजना अभी शुरुआती चरण में ही अटकी हुई है। इससे संभावित निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में, जब "चाइना प्लस वन" रणनीति के तहत विभिन्न राज्य विनिर्माण निवेश आकर्षित करने की होड़ में हैं, तब केवल नीतियां नहीं बल्कि तेजी से क्रियान्वयन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि निवेशक अब केवल प्रोत्साहन योजनाओं को नहीं, बल्कि तैयार बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक दक्षता को भी प्राथमिकता देते हैं।

क्षेत्रीय उद्योग जगत में यह आशंका भी जताई जा रही है कि परियोजना में देरी के कारण संभावित निवेश अन्य राज्यों या क्षेत्रों की ओर जा सकता है। खासकर शक्ति एयरक्राफ्ट इंडस्ट्रीज की प्रस्तावित ट्रेनर एयरक्राफ्ट निर्माण परियोजना जैसे निवेश प्रभावित हो सकते हैं। हिसार को भविष्य के एयरोस्पेस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में देखा जा रहा है। महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट के आसपास विकसित हो रहे औद्योगिक माहौल के कारण इस परियोजना का महत्व और बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि एयरोस्पेस, रक्षा निर्माण और एडवांस्ड इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेशक बेहतर लॉजिस्टिक्स, मजबूत इकोसिस्टम और समयबद्ध परियोजना क्रियान्वयन को प्राथमिकता देते हैं।

इस बीच राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि IMC-हिसार उसकी प्राथमिक परियोजनाओं में शामिल है। 15 अप्रैल को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में संबंधित विभागों को परियोजना से जुड़े सभी फैसलों को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए गए थे। सरकार का मानना है कि यह परियोजना हरियाणा में निवेश बढ़ाने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

हिसार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष देवेंद्र जैन ने कहा कि यह परियोजना पश्चिमी हरियाणा के विकास को नई गति दे सकती है और क्षेत्र को आधुनिक विनिर्माण एवं एयरोस्पेस हब में बदलने की क्षमता रखती है। उन्होंने बताया कि एसोसिएशन ने सरकार से छोटे आकार के औद्योगिक प्लॉट उपलब्ध कराने की भी मांग की है ताकि अधिक से अधिक उद्यमी इस विकास यात्रा में भागीदारी कर सकें।