हरियाणा में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं होगी मजबूत, 26 नई सरकारी आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी का होगा निर्माण
किन जिलों में बनेंगी डिस्पेंसरियां
सरकार के अनुसार सबसे अधिक 10 आयुर्वेदिक डिस्पेंसरियां यमुनानगर जिले में बनाई जाएंगी। इसके अलावा महेंद्रगढ़ में 6, रेवाड़ी में 5, कुरुक्षेत्र में 3, करनाल में 1 और गुरुग्राम में 1 डिस्पेंसरी स्थापित की जाएगी।
यमुनानगर में 10 नई डिस्पेंसरियां
यमुनानगर जिले के भंगेरा, ताजेवाला, खुर्दबन, तलाकौर, महियुद्दीनपुर, दरपुर, ढकवाला, दादूपुर हेड, दमोली और लेड़ा खदर गांवों में नई आयुर्वेदिक डिस्पेंसरियां बनाई जाएंगी। प्रत्येक डिस्पेंसरी के निर्माण पर लगभग 59.17 लाख रुपये खर्च होंगे।
कुरुक्षेत्र और करनाल में भी मिलेगा लाभ
कुरुक्षेत्र जिले के अजराना कलां, कलसा और मोहड़ी गांवों में नई डिस्पेंसरियां स्थापित की जाएंगी। इन पर क्रमशः 59.15 लाख रुपये, 59.74 लाख रुपये और 59.15 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं करनाल जिले के फफराना गांव में एक आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी बनाई जाएगी, जिसकी अनुमानित लागत 59.17 लाख रुपये होगी।
रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ में भी होगा विस्तार
रेवाड़ी जिले के रोहराई, झाबवा, जयसिंहपुर खेड़ा और करावरा मानकपुर गांवों में 59.17 लाख रुपये की लागत से डिस्पेंसरियां बनाई जाएंगी। जबकि लिसान गांव में 59 लाख रुपये की लागत से नई सुविधा विकसित की जाएगी। महेंद्रगढ़ जिले के गुढ़ा, बावानिया, रसूलपुर, बुचावास, सुरजनवास और रामबास गांवों में छह नई डिस्पेंसरियां स्थापित होंगी। प्रत्येक डिस्पेंसरी पर करीब 64.50 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
गुरुग्राम के सहजावास गांव को भी मिलेगा लाभ
गुरुग्राम जिले के सहजावास गांव में एक नई सरकारी आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 58.63 लाख रुपये तय की गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर होगी स्वास्थ्य सेवाएं
डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि नई डिस्पेंसरियों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी और लोगों को बेहतर उपचार सुविधाएं मिल सकेंगी। इससे आयुष स्वास्थ्य ढांचे को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि परियोजना का क्रियान्वयन पंचायती राज विभाग और संबंधित एजेंसियों के सहयोग से किया जाएगा। इससे ग्रामीण आबादी को निवारक स्वास्थ्य सेवाओं, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक उपचार का लाभ आसानी से मिल सकेगा। सरकार का मानना है कि यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और लोगों को आयुर्वेदिक उपचार के प्रति प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
