हरियाणा का डिजिटल प्रशासन से कदमताल, सभी विभागों के लिए ऑनलाइन अवकाश प्रबंधन प्रणाली जरूरी
चंडीगढ़, 01 मई—हरियाणा सरकार शासन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही बढ़ाने के मकसद से डिजिटल प्रशासन को और गति देने जा रही है। एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सभी विभागों के लिए ऑनलाइन लीव मैनेजमेंट सिस्टम को अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा अप्रैल 2027 तक वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) प्रणाली को भी पूरी तरह डिजिटल बनाने का सरकार का इरादा है।
इसी कड़ी में मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने आज एक उच्चस्तरीय बैठक में राज्य में ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (एचआरएमएस) तथा अन्य प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्मों के क्रियान्वयन की समीक्षा की।
मुख्य सचिव ने कहा कि डिजिटल प्रशासन नागरिकों को तेज, पारदर्शी और जवाबदेह सेवाएं उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि फाइलों की मूवमेंट से लेकर कर्मचारी प्रबंधन तक, प्रशासन के हर पहलू को पूरी तरह डिजिटल प्रणाली में बदलना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे ऑनलाइन लीव मैनेजमेंट सिस्टम का तुरंत अनुपालन सुनिश्चित करें और इसके क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट समय-सीमा प्रस्तुत करें। इसके लिए मानव संसाधन विभाग, खजाना, एनआईसी और सामान्य प्रशासन विभाग के बीच तालमेल को और मजबूत किया गया है ताकि प्रणाली को सुचारू रूप से लागू किया जा सके।
बैठक में एचआरएमएस प्लेटफॉर्म की विस्तृत समीक्षा की गई। वर्तमान में इस प्रणाली में कर्मचारी प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को कवर करने वाले 18 मॉड्यूल शामिल हैं। कई विभागों ने इसमें उत्साहजनक प्रगति दिखाई है। हालांकि मुख्य सचिव ने सभी विभागों, बोर्डों और निगमों में इसका समान रूप से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
बैठक में सेंट्रलाइज्ड फाइल मैनेजमेंट सिस्टम (सीएफएमएस) की भी समीक्षा की गई, जिसके माध्यम से डिजिटल फाइलों की मूवमेंट और आधिकारिक पत्राचार होता है। कई विभागों ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर लंबित फाइलों के निपटान में उल्लेखनीय प्रगति की जानकारी दी।
इस मामले में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए लंबित मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है। इसके बाद ग्रामीण विकास विभाग और बागवानी विभाग का स्थान रहा। दक्षता बढ़ाने के लिए 'पार्क्ड फाइल्स' नाम से एक नई श्रेणी भी शुरू की जा रही है, जिससे ऐसी फाइलों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा जिनकी भविष्य में समीक्षा आवश्यक है।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि लंबित मामलों की नियमित रूप से मासिक समीक्षा की जाए और इसके लिए अधिकारियों के स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए।
समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि पिछले कुछ वर्षों में ई-रसीदों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो डिजिटल प्रणाली के बढ़ते उपयोग को दर्शाती है। हालांकि ई-फाइलों के सृजन को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
श्री अनुराग रस्तोगी ने सभी प्रशासनिक सचिवों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने विभागों में ई-ऑफिस के क्रियान्वयन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करें। राज्य में ई-ऑफिस को समयबद्ध और पूर्ण रूप से लागू करने के लिए विभागवार और जिलावार व्यापक रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव डॉ. यशपाल ने बताया कि विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एसीआर के प्रारूप में एकरूपता लाएं और उसे अधिक वस्तुनिष्ठ तथा प्रदर्शन आधारित बनाएं। उन्होंने बताया कि एसीआर प्रणाली को सीएफएमएस, सरल और ई-ऑफिस जैसे अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्मों के साथ भी जोड़ा जाएगा, जिससे वास्तविक समय में प्रदर्शन की निगरानी संभव हो सकेगी और मूल्यांकन प्रक्रिया में व्यक्तिपरकता कम होगी।
डॉ. यशपाल ने बताया कि एचआरएमएस प्लेटफॉर्म के निरंतर सुधार के लिए सभी विभागों को डोमेन विशेषज्ञों को नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं। ये अधिकारी एनआईसी और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर विभागों की आवश्यकताओं के अनुसार डिजिटल प्रणालियों का सुचारू एकीकरण सुनिश्चित करेंगे।
इस बैठक में विभिन्न विभागों के प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
