Haryana : हरियाणा का ये गांव दहशत में...लगातार हो रही मौतें,  केंद्र सरकार अलर्ट

 
Deaths are continuously occurring in this village of Haryana
Haryana :  हरियाणा के पलवल की हथीन तहसील के छायंसा गांव के लोग डर के साये में जी रहे हैं। इसकी वजह यहां अचानक से हो रही मौतें हैं। बताया जा रहा है कि जनवरी से शुरू हुई मौत का सिलसिला अब भी जारी है। हालांकि यहां केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार की मेडिकल टीम भी आ चुकी है। इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। यहां बीते 15 दिन में 12 रहस्यमयी मौत हो चुकी हैं और इनमें से 5 स्कूली छात्र है। लेकिन ग्रामीणों को समझ नहीं आ रहा है कि आखिर मौतों का कारण क्या है।

कई घरों का पानी मिला दूषित 

मिली जानकारी के अनुसार रविवार को हेपेटाइटिस-C के 26 और हेपेटाइटिस-B के तीन मरीजों की पुष्टि हुई है। एक ही गांव से  हेपेटाइटिस-सी के 12 नए मामले सामने आने के कारण गांव में दहशत फैल गई है। संक्रमण के खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने गांव में खास स्क्रीनिंग और टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है। इसके अलावा जन स्वास्थ्य विभाग की जांच में कई घरों के पानी दूषित पाया गया। साथ ही अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई करते हुए 24 कनेक्शन काट दिए गए हैं। इसके बाद पानी में क्लोरीन मिलाकर सप्लाई किया जा रहा है। 
 
बता दें कि मेडिकल टीम द्वारा बीमार लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं। इसके अलावा पानी के साथ-साथ खून की भी जांच की जा रही है। यहां मौजूद एडवांस मेडिकल वैन और उसके साथ मौजूद डॉक्टर्स से का कहना है कि यह बीमारी खून के संक्रमण और संक्रमित सीरिंज यानी कि सुई लगाने से हो रही है। डॉक्टर्स का यह भी कहना है कि हो सकता है कि संक्रमित सीरिंज या ड्रग्स का मामला भी हो। 

फिलहाल गांवों में राज्य सरकार की तरफ से पहुंची मेडिकल टीम मस्जिदों और मंदिरों में लगे लाउडस्पीकर से लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रही है। लोगों को जागरूक करने के लिए सब्जी बेचने वाली वैन का भी इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि लोग प्रशासन के दिलासे से संतुष्ट नहीं हैं। बहुत से लोगों ने यहां पीने की पानी को लेकर शिकायत की तो कुछ लोगों ने हैं टैंक दिखाया जहां पर पानी इकट्ठा रहता है। 

महामारी से छांयसा में मरने वालों की कहानी 

उदार काला पीलिया से बीमार होकर मरने वाले शारिक,दिलशाद हुमा, उजमा और पायल के परिवार वालों का भी बुरा हाल है। 

पहली मौत 14 साल के शारिक की हुई, जो छठी कक्षा में पढ़ता था. 26 जनवरी पेट दर्द की शिकायत को लेकर उसके परिवार ने नल्लड़ मेडिकल कॉलेज में दाखिल कराया था. उसे संक्रमण का पता चला और अगले दिन यानी कि 27 जनवरी को उसकी मौत हो गई. 

वहीं दिलशाद के पिता भी अपने बेटे की मौत की कहानी बताई. दिलशाद अपने पिता शम्सुद्दीन के साथी चेन्नई की एक कंपनी में काम करता था. वह चेन्नई से लौटकर छांयासा आया था और यहां अचानक उसे बुखार चढ़ा और जांच के 48 घंटे के बाद उसकी मौत हो गई. दिलशाद के पिता खराब पानी के साथ-साथ डॉक्टरों पर लापरवाही का भी आरोप लगा रहे हैं.य 

14 साल की लड़की की अचानक हुई मौत

केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली महामारी रोग निवारण की टीम ने पलवल के छांयासा गांव में भेज दी है. महामारी रोग निवारण टीम ने घर-घर जाकर पूरी बात पता की और सैंपल भी लिए. इसके बाद यह टीम स्वास्थ्य मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट देगी लोग हो गए.