Haryana: हरियाणा में तैनात 5 पुलिस कमिश्नरों की शक्तियों में समानता नहीं, देखें पूरी जानकारी 

 
Haryana: हरियाणा में तैनात 5 पुलिस कमिश्नरों की शक्तियों में समानता नहीं, देखें पूरी जानकारी 
चंडीगढ़ - हरियाणा में  वर्तमान 23 राजस्व (सामान्य)  ज़िलों और एक   विशेष पुलिस  जिला नामत: सिरसा में डबवाली  में  मौजूदा  तैनात  पुलिस कप्तानों    में से  पांच ज़िलों- गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत और झज्जर  में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था हैं, इसलिए वहीं  पर जिला पुलिस अधीक्षक  एस.पी. के स्थान पर  न्यूनतम आई.जी. (इंस्पेक्टर जनरल - पुलिस महानिरीक्षक) रैंक या ए.डी.जी.पी. (अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक)  रैंक तक के   वरिष्ठ आई.पी.एस. अधिकारी को बतौर  पुलिस कमिश्नर (आयुक्त) तैनात किया  जाता  है.  

वर्तमान में गुरुग्राम में 1998 बैच के आई.पी.एस.  विकास अरोड़ा, जो ए.डी.जी.पी. रैंक में हैं,  बतौर  पुलिस कमिश्नर तैनात हैं. वहीं फरीदाबाद में 2004 बैच के  आई.पी.एस.  सतेन्द्र कुमार, जो आई.जी. रैंक में है,  पुलिस आयुक्त  तैनात  हैं.  पंचकूला में 1999 बैच के आई.पी.एस. सिबास कबिराज और झज्जर में भी  1999 बैच की आई.पी.एस. डॉ. राजश्री सिंह, जो दोनों ए.डी.जी.पी.  रैंक  में हैं, बतौर  पुलिस कमिश्नर तैनात है. वहीं 1996 बैच की आई.पी.एस. ममता सिंह, जो ए.डी.जी.पी. रैंक में हैं, के पास वर्तमान में सोनीपत पुलिस कमिश्नर  का पद अतिरिक्त कार्यभार के तौर पर है.   

बहरहाल,  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बी.एन.एस.एस.), 2023 की धारा 163 ( जो जुलाई, 2024 से पहले दंड प्रक्रिया संहिता (सी.आर.पी.सी.), 1973 की धारा 144 थी)   में डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (डी.एम.) अर्थात   ज़िलाधीश ), सब-डिविजनल  मजिस्ट्रेट (एस.डी.एम.) अर्थात - उपमंडलाधीश ) या राज्य सरकार द्वारा विशेष तौर पर प्राधिकृत एग्जीक्यूटिव (कार्यकारी ) मजिस्ट्रेट   अपने अपने सम्बंधित ज़िले/क्षेत्र में न्यूसेंस  या आशंकित खतरे के अति-आवश्यक मामलों में उपयुक्त आदेश जारी कर  सकता है.

बहरहाल  जहाँ तक प्रदेश के  पांच  ज़िलों जिसमें से दो प्रदेश के महानगर - गुरुग्राम और  फरीदाबाद भी शामिल हैं  एवं इसके अतिरिक्त पंचकूला, सोनीपत और झज्जर जिले  में पुलिस कमिश्नर स्थापित करने की गजट  नोटिफिकेशन, जो प्रदेश के  गृह विभाग   द्वारा जारी की गई, में से पंचकूला, सोनीपत और झज्जर   ज़िले के पुलिस कमिश्नर को ही दंड प्रक्रिया संहिता(सी.आर.पी.सी.), 1973  की 144 में  ज़िलाधीश ( अब जुलाई, 2024 के बाद बी.एन.एस.एस. की धारा 163) की शक्ति  प्रदान है  जबकि उनके अधीन तैनात डी.सी.पी. (पुलिस उपायुक्त) एवं ए.सी.पी. (सहायक पुलिस आयुक्त) को एग्जीक्यूटिव  मजिस्ट्रेट की शक्ति प्रदान है. इस प्रकार  पंचकूला, सोनीपत और झज्जर  ज़िले  में धारा  163 बी.एन.एस.एस. ( पूर्ववत धारा 144 सी.आर.पी.सी.) के अंतर्गत आदेश न केवल वहां तैनात   पुलिस कमिश्नर  के द्वारा बल्कि उसके अधीन आने वाले  डी.सी.पी./ए.सी.पी. द्वारा भी जारी किये जा सकते है.

अब  प्रश्न यह उत्पन्न होता है कि जब पंचकूला, सोनीपत और झज्जर  के पुलिस कमिश्नर को धारा 163 बी.एन.एस.एस में ज़िलाधीश  और  उसके अधीन कार्यरत  डी.सी.पी./ए.सी.पी.  को कार्यकारी मजिस्ट्रेट  की शक्तियां  प्रदान की जा सकती है, तो दोनों  महानगरों गुरुग्राम और फरीदाबाद, जहाँ पिछले  17-18 वर्षो से पुलिस कमिशनरेट स्थापित हैं  एवं जहाँ इनके अधीन कई  पुलिस ज़िले भी हैं, वहां के पुलिस कमिश्नर को  ऐसी शक्ति क्यों नहीं प्रदान की गयी है.  आज तक गुरुग्राम और फरीदाबाद के पुलिस कमिश्नर को धारा 163 बी.एन.एस.एस. ( पहले धारा 144 सी.आर.पी.सी.) में ज़िलाधीश तो दूर, कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्ति तक  प्रदान नहीं की है जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है.

वर्तमान में  हरियाणा के सभी 23 ज़िलों में  पंचकूला, सोनीपत और झज्जर   को छोड़कर शेष 20 ज़िलों में धारा  163 बी.एन.एस.एस. ( पहले धारा 144 सी.आर.पी.सी.) में आदेश सम्बंधित ज़िले के डी.सी. (उपायुक्त )  द्वारा ज़िलाधीश के तौर पर ( या ज़िले के उपमंडलों में एस.डी.एम.)  द्वारा  जारी किये जा सकते हैं जिनमें गुरुग्राम और फरीदाबाद ज़िले (पुलिस कमिश्नरेट ) भी शामिल है. अब  चूँकि हरियाणा पुलिस कानून, 2007 में स्थापित हर पुलिस कमिश्नरेट एक   पुलिस रेंज भी  है एवं पुलिस कमिश्नर का स्तर न्यूनतम आई.जी.   रैंक या ए.डी.जी.पी. रैंक तक भी होता है, इसलिए हेमंत का तर्क है कि या  तो पंचकूला, सोनीपत और झज्जर  की तर्ज पर गुरुग्राम और फ़रीदाबाद के  पुलिस कमिश्नरों  को भी धारा 163 बी.एन.एस.एस. में ज़िलाधीश की शक्ति  मिलनी चाहिए अथवा पंचकूला, सोनीपत और झज्जर  पुलिस कमिश्नर से  भी धारा 163  बी.एन.एस.एस. में जिलाधीश  की शक्ति वापिस लेकर जिले के डी.सी. को  दे देनी चाहिए. वैसे हरियाणा पुलिस कानून, 2007 की धारा 8 अनुसार  पुलिस कमिश्नरेट में जिलाधीश की शक्ति पुलिस कमिश्नर द्वारा प्रयोग होनी चाहिए. इस बारे में हेमंत द्वारा गत वर्षो में कई बार प्रदेश सरकार और  गृह विभाग के प्रशासनिक सचिव   को लिखा गया  परन्तु दुर्भाग्यवश आज तक इस पर कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है.