Haryana : हरियाणा कांग्रेस के 5 विधायकों पर लटकी तलवार, जानें ऐसा क्या हुआ ? 

 
Sword hangs over 5 Congress MLAs.
Haryana : हरियाणा राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के मामले में कांग्रेस में घमासान बढ़ता जा रहा है। पार्टी नेतृत्व इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़ी कार्रवाई के मूड में है। संभावना जताई जा रही है कि सभी पांचों विधायकों को पार्टी से निष्कासित किया जा सकता है। 30 मार्च को दिल्ली में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विधायक दल की बैठक बुलाई है। इसमें इन विधायकों के भविष्य पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

पांच विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी

हरियाणा कांग्रेस की अनुशासन कमेटी ने चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोप में पांच विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नरायणगढ़ से विधायक शैली चौधरी, साढ़ौरा से रेनू बाला और रतिया से जरनैल सिंह ने नोटिस का जवाब दे दिया है। तीनों ने ही पार्टी लाइन में रहते हुए कर्मवीर बौद्ध को वोट देने की बात कही है। तीनों विधायकों के जवाब से पार्टी संतुष्ट नजर नहीं आ रही है। वहीं, पुन्हाना से विधायक मोहम्मद इलियास और हथीन से विधायक मोहम्मद इसराइल ने कमेटी को जवाब न देकर एक तरह से कांग्रेस से बगावत के संकेत दिए हैं।

इस्तीफे की चर्चा और उपचुनाव की आहट

नारायणगढ़ की विधायक शैली चौधरी और पुन्हाना के विधायक मोहम्मद इलियास के इस्तीफे की चर्चाएं तेज हैं। कहा जा रहा है कि ये दोनों विधायक अपनों के लिए ही सीटें छोड़ सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो इन सीटों पर उपचुनाव होंगे, जहां कांग्रेस अपने ही नए चेहरों पर दांव लगा सकती है। दूसरी तरफ भाजपा भी अपना दावा करेगी। चर्चा है कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में भाजपा भी अपना पैठ मजबूत करने की दिशा में दांव खेल सकती है।

अनुशासन कमेटी की रिपोर्ट में सख्त रुख

अनुशासन समिति ने अपनी रिपोर्ट शनिवार को दिल्ली हाईकमान को भेज दी है। इसमें कमेटी ने साफ कहा है कि दो विधायकों ने नोटिस का जवाब न देकर गंभीर अनुशासनहीनता की है। समिति ने सभी तथ्यों का हवाला देते हुए कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है, जिससे संकेत मिलते हैं कि पार्टी सख्त कदम उठा सकती है।

निष्कासन के बाद क्या विकल्प

अगर पांचों विधायकों को पार्टी से निकाला जाता है तो उनके सामने सीमित विकल्प रह जाएंगे। वे निर्दलीय के रूप में काम जारी रख सकते हैं या किसी अन्य दल में शामिल होने की राह चुन सकते हैं। हालांकि, दल-बदल कानून के चलते उन्हें विधानसभा सदस्यता पर भी खतरा हो सकता है। ऐसे में उनका अगला राजनीतिक कदम बेहद अहम माना जा रहा है।