Haryana News: 33 करोड़ से खुली 800 करोड़ के स्कैम की परतें, दुबई से चल रहा ऑनलाइन गेम और साइबर ठगी का देशव्यापी नेटवर्क
Haryana News: सिरसा की डबवाली रोड स्थित कंपनी एस एफ फूड प्रो टेक लिमिटेड से 33 करोड़ रुपये के गबन का मामला अब देशव्यापी ऑनलाइन गेमिंग और साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा बन चुका है। कंपनी के मुनीम साकेत कुमार द्वारा की गई ठगी की जांच जब आगे बढ़ी, तो इसके तार दिल्ली और दुबई तक जा पहुंचे। हरियाणा स्टेट क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने खुलासा किया है कि यह सिर्फ 33 करोड़ का मामला नहीं, बल्कि 500 से 800 करोड़ रुपये तक का बड़ा संगठित स्कैम हो सकता है। जांच के दौरान सामने आया कि गबन की गई 33 करोड़ रुपये की राशि 14 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी।
एसआईटी ने जब इन खातों की गहन पड़ताल की, तो पता चला कि देशभर में करीब 125 बैंक खाते इसी नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। चौंकाने वाली बात यह रही कि कई खाते ऐसे लोगों के नाम पर खोले गए थे, जिन्हें असल लेनदेन की जानकारी तक नहीं थी। पंजाब के बठिंडा निवासी बलजिंद्र के नाम से खोले गए खाते में लाखों की ट्रांजेक्शन मिली, जबकि वह खुद एक साधारण मजदूर परिवार से जुड़ा है और किराये पर गाड़ी चलाता है। उसे हर महीने 10 हजार रुपये देकर दस्तावेज और सिम का इस्तेमाल किया जाता था।
दिल्ली बना ऑपरेशन सेंटर, दुबई से कंट्रोल
जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क का संचालन दिल्ली से किया जा रहा था, जबकि असली सरगना दुबई में बैठा है। दिल्ली के अशोक निकेतन निवासी हरजिंद्र सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है। उसके साले हरमीत सिंह को इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जो दुबई से पूरे रैकेट को संचालित कर रहा है।
प्राथमिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि प्राइवेट बैंकों के कुछ अधिकारियों से मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खाते खुलवाए जाते थे। इन खातों में ऑनलाइन गेमिंग और साइबर ठगी से प्राप्त रकम डाली जाती थी। इसके बाद हवाला के जरिए पैसा दुबई भेज दिया जाता था।
ऑनलाइन गेमिंग एप्स और क्रिकेट सट्टा बाजार से जुड़ाव
स्टेट क्राइम ब्रांच सिरसा टीम से एसआईटी इंचार्ज सब इंस्पेक्टर प्रह्लाद सिंह के अनुसार, रकम ऑनलाइन गेमिंग एप्स और क्रिकेट सट्टा बाजार में लगाई जाती थी। फर्जी आईडी बनाकर बड़ी रकम घुमाई जाती थी ताकि पैसों का स्रोत छुपाया जा सके। आरोपी एक व्यक्ति के नाम पर 10 से 15 खाते तक संचालित कर रहे थे। इस नेटवर्क का मकसद सिर्फ ऑनलाइन गेमिंग नहीं, बल्कि साइबर ठगी के जरिए देशभर से पैसा इकट्ठा करना था। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को कई राज्यों से जुड़े लेनदेन के सुराग मिले हैं।
हरियाणा स्टेट क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई
हरियाणा स्टेट क्राइम ब्रांच के एडीजीपी संजय सिंह के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया। सब इंस्पेक्टर प्रहलाद सिंह के नेतृत्व में टीम ने दिल्ली में छापेमारी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। जिला पुलिस अधीक्षक दीपक सहारन ने बताया कि मामले में अब तक साकेत कुमार सहित 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। हरजिंद्र सिंह को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पूछताछ में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
दुबई तक फैला हवाला नेटवर्क,देशव्यापी जांच की तैयारी
जांच में यह भी सामने आया है कि भारत से जुटाई गई रकम को यहां किसी संपत्ति में निवेश नहीं किया जाता था, बल्कि पूरा पैसा दुबई भेजा जाता था। वहां से नेटवर्क का संचालन किया जाता था। पुलिस का मानना है कि यह संगठित अपराध का बड़ा मॉडल है, जिसमें ऑनलाइन गेमिंग, सट्टा बाजार और साइबर ठगी को एक साथ जोड़ा गया है।
स्टेट क्राइम ब्रांच का अनुमान है कि यह स्कैम 500 से 800 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। 125 बैंक खातों की पहचान के बाद जांच और तेज कर दी गई है। कई राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों से भी समन्वय की तैयारी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नेटवर्क से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। दुबई में बैठे मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए कानूनी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कदम उठाए जा रहे हैं। 33 करोड़ के गबन से शुरू हुई यह कहानी अब देश के सबसे बड़े ऑनलाइन गेमिंग और साइबर ठगी नेटवर्क में से एक का खुलासा बन चुकी है।
वर्ष 2024 में एसएफफूड कंपनी के साथ मुनीम ने किया था 33 करोड़ का गबन
सिरसा की डबवाली रोड स्थित राइस मिल मशीनरी उपकरण बनाने वाली कंपनी एसएफफूड प्रो टेक लिमिटेड के संचालक के साथ दो साल पहले उसके मुनीम साकेत कुमार ने करीब 33 करोड़ रुपये का गबन किया था। 1 जून 2024 को थाना सिविल लाइन सिरसा में मामला दर्ज हुआ था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया तो उसने स्व्ीकार किया कि उसने ऑनलाइन गेम में यह राशि लगा दी। पुलिस ने आरोपी तो जेल में भेज दिए मगर पैसे की कोई रिकवरी नहीं हुई। ऑनलाइन गेम से ठगी गई राशि और पूरे इस नेटवर्क को उखाड़ने के लिए यह जांच जिला पुलिस के बाद डीजीपी ने स्टेट क्राइम हरियाणा को सौंपी थी।
एडीजीपी संजय सिंह के निर्देश पर सब इंस्पेक्टर प्रहलाद सिंह के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने बैंक रिकॉर्ड खंगाले। जांच में पता चला कि 33 करोड़ रुपये 14 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए। उसके बाद अब टीम इस साइबर ठगी और ऑनलाइन गेम के नेटवर्क को उखाड़ने में जुटी हुई है
