Haryana News: टूरिज्म हब बनेगा हरियाणा का राखीगढ़ी, 15 'आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों' सूची में होगा शामिल
राखीगढ़ी विश्व की पुरानी सभ्यताओं में से एक है। यहां पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की तरफ से की गई खुदाई में मोहनजोदड़ो के बाद सबसे बड़ा सिंध घाटी स्थल राखीगढ़ी से मिले निष्कर्षों को लेकर पुरातत्विक और इतिहासकार उत्साहित है।
वरिष्ठ पुरातत्वविद इसे कोई साधारण हड़प्पा स्थल नहीं मानते और कहते हैं कि यह भारत के सभी पुरातात्विक स्थलों में सबसे महत्वपूर्ण है। इस स्थल का क्षेत्रफल और आयाम पुरातत्वविदों ब्रिजेट ऑलचिन और जे.एम. केनियर द्वारा किए गए आकलन से कहीं अधिक विस्तृत है।
राखीगढ़ी 224 हैक्टेयर में फैला हुआ है। यह देश का सबसे बड़ा स्थल है। आकार, आयाम, रणनीतिक स्थिति और बस्ती के अनूठे महत्व के मामले में राखीगढ़ी हर स्तर पर हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के बराबर है। राखीगढ़ी में सिंधु घाटी सभ्यता के प्रारंभिक, परिपक्व और उत्तरकालीन 3 चरण पाए गए हैं।
राखीगढ़ी में खोजी जा चुकी 6 हजार साल पुरानी हड़प्पाकालीन सभ्यता
यहां 6 हजार साल पुरानी हड़प्पाकालीन सभ्यता खोजी जा चुकी है। यहां पर खुदाई के दौरान 5 दर्जन से ज्यादा कंकाल मिल चुके हैं। महिलाओं के गहने, पुरानी लिपी और पानी का खास निकासी सिस्टम भी मिला है। राखीगढ़ी दो शब्दों का योग है, राखी एवं गढ़ी।
राखी दृषदृवती का अन्य नाम है। इस नदी के किनारे बसे शहर को राखीगढ़ी कहा गया। धौलावीरा, कच्छ, गुजरात के बाद राखीगढ़ी हड़प्पा सभ्यता के समय का एक विशाल स्थल है।
यह दिल्ली के पश्चिम-उत्तर में 130 किलोमीटर की दूरी पर विलुप्त सरस्वती-दृषद्वती नदी के पास नारनौंद तहसील में स्थित है। कुल 5 विशाल थेह थे और हाल ही में हुई खुदाई के दौरान हड़प्पा सभ्यता के योजनाबद्ध तरीके से निर्मित नगर व्यवस्था, रिहायशी घर जिसमें कमरे, रसोई, स्नानघर, सडकें, अनाज रखने के बर्तन, पानी निकासी की व्यवस्था, नगर की नाकाबंदी इत्यादि के अवशेष मिले हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राखीगढ़ी का पुरातात्विक महत्व देखते हुए इसे वर्ल्ड हैरिटेज में शामिल कर लिया गया है।
