Haryana: हरियाणा कैबिनेट ने दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत RRTS कॉरिडोर को मंज़ूरी दी, देखें क्या है पूरा प्लान ?
मंज़ूर प्रस्ताव के अनुसार, यह कॉरिडोर दिल्ली से पानीपत तक और उससे आगे करनाल तक फैला होगा, जिसकी कुल लंबाई लगभग 136.30 किमी होगी। परियोजना की अनुमानित कुल लागत लगभग ₹33,051.15 करोड़ है, जिसमें से हरियाणा सरकार का हिस्सा ₹7,472.11 करोड़ है। राज्य का योगदान चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा।
इस परियोजना में हरियाणा में 11 स्टेशनों का प्रस्ताव है, जो राज्य के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के बीच निर्बाध और उच्च गति की कनेक्टिविटी प्रदान करेंगे। उम्मीद है कि यह कॉरिडोर यात्रा के समय को काफी कम करेगा, सड़कों पर भीड़भाड़ कम करेगा और प्रदूषण नियंत्रण में योगदान देगा।
कैबिनेट ने यह भी मंज़ूरी दी कि डिपो के बुनियादी ढांचे की योजना NCRTC और संबंधित भूमि-स्वामित्व वाली एजेंसी द्वारा संयुक्त रूप से बनाई जाएगी। डिपो को ज़मीनी स्तर पर विकसित किया जाएगा, जिसके ऊपर वाणिज्यिक विकास के प्रावधान होंगे, जिससे अतिरिक्त राजस्व सृजन संभव हो सकेगा।
परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता को मज़बूत करने के लिए, 'ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट' (TOD) नीति के तहत RRTS स्टेशनों के आसपास के क्षेत्रों में उच्च 'फ्लोर एरिया रेशियो' (FAR) की अनुमति देने के प्रावधान किए गए हैं। इससे नियोजित शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा और परियोजना के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाए जा सकेंगे।
कैबिनेट ने नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के प्रशासनिक सचिव को इस परियोजना के लिए नोडल अधिकारी नामित किया है और उन्हें NCRTC के साथ समझौतों तथा संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत किया है। मुख्यमंत्री को भी कार्यान्वयन के दौरान आने वाली बाधाओं या कठिनाइयों को दूर करने के लिए आवश्यक किसी भी बदलाव या संशोधन को मंज़ूरी देने का अधिकार दिया गया है।
उम्मीद है कि यह कॉरिडोर रोज़गार, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच को बेहतर बनाएगा, साथ ही संतुलित और सतत क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देगा।
मंत्रिमंडल की बैठक में यह भी इच्छा जताई गई कि इस RRTS कॉरिडोर का विस्तार करनाल से आगे कुरुक्षेत्र एवं साहा होते हुए पंचकूला तक किया जाए , तथा इस विषय को भारत सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय एवं NCRTC के साथ उठाया जाए।
