हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने रवींद्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर अर्पित की पुष्पांजलि
चंडीगढ़, 7 अगस्त - हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने शुक्रवार को लोक भवन में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित महान कवि एवं साहित्यकार रवींद्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। उन्होंने टैगोर को भारत की महान साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विभूतियों में से एक बताते हुए कहा कि उनकी अमिट विरासत भौगोलिक, भाषाई और काल की सीमाओं से परे है।
राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर भारत की आध्यात्मिक एवं मानवतावादी विरासत के सशक्त स्वर थे। उन्होंने साहित्य, संगीत, शिक्षा, दर्शन और सामाजिक चिंतन के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान देकर न केवल भारतीय संस्कृति को समृद्ध किया, बल्कि विश्व की सांस्कृतिक चेतना को भी गहराई से प्रभावित किया।
राज्यपाल ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर न केवल एक महान साहित्यिक प्रतिभा थे बल्कि वे एक विलक्षण सांस्कृतिक एवं बौद्धिक व्यक्तित्व भी थे। उन्होंने भारत की गहन मानवतावादी परंपराओं को सार्वभौमिक अभिव्यक्ति प्रदान की। उनके असाधारण योगदान ने साहित्य, संगीत, शिक्षा, दर्शन और सामाजिक चिंतन को नई दिशा दी तथा भारत और विश्व की सांस्कृतिक चेतना पर अमिट छाप छोड़ी।
प्रो. घोष ने कहा कि टैगोर की रचनाएँ अपनी कालातीत प्रासंगिकता और सार्वभौमिक अपील के कारण आज भी पीढ़ियों को प्रेरित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर के शब्द और उनका व्यापक मानवतावादी दृष्टिकोण हमें यह स्मरण कराते हैं कि सच्ची महानता सीमाओं, भाषाओं और युगों से परे होती है। मानवता, सद्भाव और सार्वभौमिक भाईचारे के प्रति उनका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उनका जीवन और उनकी रचनाएँ हमें करुणा, रचनात्मकता, ज्ञान और पारस्परिक सम्मान पर आधारित समाज के निर्माण के लिए सदैव प्रेरित करती रहेंगी।
प्रो. घोष ने रवींद्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर उन्हें गहरे सम्मान और कृतज्ञता के साथ स्मरण करते हुए कहा कि भारत की बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विरासत में उनका योगदान अतुलनीय है। मानवीय गरिमा, करुणा और सद्भाव का उनका सार्वभौमिक संदेश आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा।
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