हरियाणा सरकार का बड़ा दांव, MSME सेक्टर को मिलेगी नई उड़ान 

चंडीगढ़: हरियाणा सरकार इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2.0 लागू करने के बाद अब जल्द ही नई ‘प्रोग्रेसिव MSME एंड एक्सपोर्ट पॉलिसी’ अधिसूचित करने जा रही है। इस नीति का उद्देश्य राज्य को वैश्विक औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को मजबूत आधार प्रदान करना है। हरियाणा के उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार बड़े निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ MSME क्षेत्र को भी प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि नई नीति हरियाणा को MSME और निर्यात केंद्र के रूप में और मजबूत बनाएगी।
 
हरियाणा सरकार का बड़ा दांव, MSME सेक्टर को मिलेगी नई उड़ान
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2.0 लागू करने के बाद अब जल्द ही नई ‘प्रोग्रेसिव MSME एंड एक्सपोर्ट पॉलिसी’ अधिसूचित करने जा रही है। इस नीति का उद्देश्य राज्य को वैश्विक औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को मजबूत आधार प्रदान करना है। हरियाणा के उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार बड़े निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ MSME क्षेत्र को भी प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि नई नीति हरियाणा को MSME और निर्यात केंद्र के रूप में और मजबूत बनाएगी।

5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य

सरकार की ‘मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026’ के तहत 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। बड़े, मेगा और अल्ट्रा-मेगा प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देकर राज्य में एक मजबूत औद्योगिक नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे स्थानीय MSME इकाइयों को भी लाभ मिलेगा।

छोटे उद्योगों को मिलेगा बड़ा बाजार

नई नीति के तहत बड़े विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और कंपोनेंट प्रोजेक्ट्स के आसपास विशाल विक्रेता (वेंडर) नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इससे स्थानीय MSME इकाइयों को नए औद्योगिक पार्कों, औद्योगिक मॉडल टाउनशिप (IMT) और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर जैसी आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के कारण छोटे उद्योगों की परिचालन लागत घटेगी और उन्हें नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।

महिला उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन

सरकार ने महिला उद्यमियों सहित विभिन्न क्षेत्रों के निवेशकों के लिए नौ विशेष सेक्टर-आधारित नीतियां तैयार की हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग (ESDM), फार्मास्युटिकल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन नीतियों के तहत पूंजीगत व्यय (CAPEX) और संचालन व्यय (OPEX) पर सब्सिडी, अनुसंधान एवं विकास सहायता और रोजगार सृजन प्रोत्साहन जैसी सुविधाएं दी जाएंगी।

संतुलित औद्योगिक विकास पर जोर

अमित कुमार अग्रवाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसा संतुलित औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है, जिसमें बड़े प्रोजेक्ट्स की वृद्धि का सीधा लाभ MSME क्षेत्र को मिले। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था महिला उद्यमियों और छोटे कारोबारियों को वित्तीय सहायता और लचीलापन प्रदान करेगी, जिससे वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

हरित और समावेशी विकास को बढ़ावा

नई नीति के तहत निर्यात प्रोत्साहन, हरित उद्योगों के लिए विशेष लाभ और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को भी शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे हरियाणा केवल निवेश आकर्षित करने वाला राज्य नहीं रहेगा, बल्कि नवाचार, उद्यमिता और टिकाऊ औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।