हरियाणा में लाल डोरे के अंदर की जमीनों के विवादों का होगा फटाफट निपटान, कैबिनेट ने बनाई ये नई पॉलिसी

 
हरियाणा में लाल डोरे के अंदर की जमीनों के विवादों का होगा फटाफट निपटान, कैबिनेट ने बनाई ये नई पॉलिसी

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में 'हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहित होना, अंकन और निपटारा) अधिनियम, 2025' के तहत बनाए गए 'हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहित होना, अंकन और निपटारा) नियम, 2026' को स्वीकृति प्रदान की गई।

 

ये नियम अधिनियम को व्यावहारिक रूप देने और पूरे राज्य में आबादी देह (लाल डोरा) क्षेत्रों के भीतर स्थित संपत्तियों के स्वामित्व अधिकारों को दर्ज करने, निहित करने तथा उनका निपटारा करने के लिए एक व्यापक ढांचा स्थापित करने के उद्देश्य से स्वीकृत किए गए हैं।

 

यह निर्णय ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति धारकों को कानूनी स्पष्टता प्रदान करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, जहां लंबे समय से कब्जा होने के बावजूद ऐतिहासिक रूप से स्वामित्व अधिकार दर्ज नहीं रहे हैं। ये नियम अधिकारों के स्थाई रिकॉर्ड तैयार करने की सुविधा प्रदान करेंगे और अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार स्वामित्व निर्धारित करने के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराएंगे।

 

नियमों में यह प्रावधान किया गया है कि स्वामित्व अधिकारों के निर्धारण की प्रक्रिया संक्षिप्त (समरी) कार्यवाहियों के माध्यम से की जाएगी। दावों के निष्पक्ष न्यायनिर्णयन को सुनिश्चित करने के लिए अधिनियम के तहत नामित अधिकारियों को व्यक्तियों को समन भेजने, दस्तावेज़ मंगवाने और साक्ष्य दर्ज करने हेतु सिविल कोर्ट के समान शक्तियां प्रदान की जाएंगी। अधिकारों के प्रारूप रिकॉर्ड (ड्राफ्ट रिकॉर्ड) को प्रकाशित किया जाएगा, हितधारकों से आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा सभी संबंधित पक्षों के हितों की रक्षा के लिए एक प्रभावी अपील एवं पुनरीक्षण (रिवीजन) तंत्र को शामिल किया गया है।

 

यह पहल स्वामित्व  योजना के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्रों के किए गए सर्वेक्षण और मैपिंग पर आधारित है, जिसे 8 मार्च 2019 को भारतीय सर्वेक्षण विभाग  और हरियाणा सरकार के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के बाद शुरू किया गया था। संपत्तियों की सटीक पहचान और मैपिंग के लिए आधुनिक सर्वेक्षण प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया गया है, जिसने स्पष्ट स्वामित्व रिकॉर्ड स्थापित करने की नींव रखी है।

 

कैबिनेट के इस निर्णय से लाखों ग्रामीण संपत्ति धारकों को कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त स्वामित्व रिकॉर्ड मिलने, संपत्ति से जुड़े विवादों में कमी आने, भूमि प्रशासन के मजबूत होने और संपत्ति के स्वामित्व से जुड़ी वित्तीय व अन्य संस्थागत सेवाओं तक पहुंच में सुधार होने की उम्मीद है।