हरियाणा कैबिनेट का महत्वपूर्ण फैसला, स्टार्टअप के लिए अधिक प्रोत्साहन

 महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को विशेष सहायता और हरियाणा के स्टार्टअप प्रणाली को मजबूत करने के लिए नई पहल
 
हरियाणा कैबिनेट का महत्वपूर्ण फैसला, स्टार्टअप के लिए अधिक प्रोत्साहन

 

चंडीगढ़, 13 अगस्त- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मौजूदा हरियाणा राज्य स्टार्टअप नीति 2022 में व्यापक पूरक प्रावधान को मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य राज्य में स्टार्टअप प्रणाली को और मजबूत करना, नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देना, स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना तथा उभरते उद्यमियों को बेहतर वित्तीय एवं संस्थागत सहायता उपलब्ध कराना है।

 

यह पूरक प्रावधान संकल्प पत्र के तहत की गई वित्त वर्ष 2025-26 के बजट भाषण की विभिन्न घोषणाओं, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री के निर्देशों तथा मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा विभिन्न राज्य स्तरीय कार्यक्रमों और स्टार्टअप एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ संवाद के दौरान की गई घोषणाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य नीति के तहत अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना तथा स्टार्टअप को उनके विकास के विभिन्न चरणों में अधिक प्रभावी सहायता प्रदान करना है।

 

पूरक प्रावधानों के तहत महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को एक वर्ष के लिए लीज के किराए में 50 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी, जो अधिकतम 10 लाख रुपये तक होगी। महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को सात वर्ष की अवधि के लिए शुद्ध एसजीएसटी की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति भी दी जाएगी, जो स्थायी पूंजी निवेश (एफसीआई) के 100 प्रतिशत की सीमा तक होगी। सामान्य स्टार्टअप को सात वर्ष की अवधि तक एसजीएसटी की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति मिलेगी।

 

मंजूर किए गए पूरक प्रावधानों के तहत स्टार्टअप को टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग/टेक्नोलॉजी हस्तांतरण के लिए 10 लाख रुपये तक की सहायता भी दी जाएगी। इसके अलावा, हस्तशिल्प एवं पारंपरिक वस्त्र, पर्यावरण अनुकूल ग्रामीण उत्पाद, आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य एवं कल्याण उत्पाद तथा स्वदेशी खाद्य उत्पाद जैसे क्षेत्रों में कार्य करने वाले महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक के विषयगत सूक्ष्म अनुदान के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाएगा।

 

स्टार्टअप को बड़े बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने के लिए घरेलू आयोजनों और प्रदर्शनियों में भागीदारी हेतु वित्तीय सहायता दी जाएगी। सामान्य स्टार्टअप को भागीदारी लागत के लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक, जबकि महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को प्रति वर्ष 7 लाख रुपये तक की सहायता मिलेगी।

 

सरकार ने स्टार्टअप को गुणवत्ता मानकों को अपनाने और प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने के प्रावधान भी किए हैं। स्टार्टअप को गुणवत्ता प्रमाण-पत्र प्राप्त करने पर होने वाली लागत की 50 प्रतिशत की एकमुश्त प्रतिपूर्ति मिलेगी, जो अधिकतम 25 लाख रुपये तक होगी।

 

स्कूल स्तर पर नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विद्यार्थियों के बीच 10,000 ‘डू-इट-योरसेल्फ’ (डीआईवाई) किट वितरित की जाएंगी। हरियाणा में एक विश्वस्तरीय इन्क्यूबेटर ‘एच-हब’ भी स्थापित किया जाएगा। इसे राज्य के प्रमुख स्टार्टअप, कॉरपोरेट और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से विकसित किया जाएगा। यह इन्क्यूबेटर स्टार्टअप को आधुनिक सुविधाएं और उनके उद्यमों को विस्तार देने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा।

 

सरकारी खरीद में स्टार्टअप के लिए अधिक अवसर पैदा करने के उद्देश्य से हरियाणा सरकार अपनी वार्षिक विभागीय खरीद का 10 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा आधारित पात्र स्टार्टअप के लिए आरक्षित करेगी। इसके अलावा, हरियाणा में कार्यरत कॉरपोरेट कंपनियों को राज्य आधारित स्टार्टअप के साथ पायलट परियोजनाएं शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए 10 लाख रुपये तक की मैचिंग ग्रांट दी जाएगी, बशर्ते संबंधित कॉरपोरेट कंपनियां ऐसी पायलट परियोजनाओं को स्टार्टअप के साथ अनुबंध में परिवर्तित करें।

 

स्टार्टअप में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार सीड फंड मैचिंग प्रोविजन के तहत निजी या एंजल निवेशक से जुटाए गए प्रत्येक 25 लाख रुपये के निवेश पर 25 लाख रुपये तक का सह-निवेश या मैचिंग ग्रांट उपलब्ध कराएगी।

 

युवा प्रतिभाओं और स्टार्टअप के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने के लिए राज्य के विश्वविद्यालयों और पॉलिटेक्निक संस्थानों में विभिन्न पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को स्टार्टअप के साथ अप्रेंटिसशिप करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पात्र स्टार्टअप को प्रति अप्रेंटिस प्रति माह 7,500 रुपये तक के वजीफे की 50 प्रतिशत लागत की प्रतिपूर्ति मिलेगी। यह सुविधा प्रति इकाई प्रति वर्ष अधिकतम 50 अप्रेंटिस तक सीमित होगी।

 

क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा स्टोरेज की बढ़ती आवश्यकताओं को देखते हुए क्लाउड कंप्यूटिंग/स्टोरेज पर होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति का दायरा भी बढ़ाया गया है। अब हरियाणा आधारित स्टार्टअप को भारत में स्थित किसी भी डेटा सेंटर में किए गए ऐसे खर्च की 75 प्रतिशत प्रतिपूर्ति मिलेगी। यह सहायता पांच वर्ष की अवधि तक प्रति वर्ष 2.5 लाख रुपये तक होगी।

 

मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर एक अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान के अनुसार, चंडीगढ़ में पंजीकृत कार्यालय वाले स्टार्टअप को भी श्रेणी-2 स्टार्टअप माना जाएगा। इससे वे हरियाणा स्टार्टअप नीति के तहत उपलब्ध लाभ प्राप्त करने के पात्र होंगे।