Haryana Budget 2026: हरियाणा में सिंचाई व्यवस्था को नया बल, जल प्रबंधन पर बड़ा बजट आवंटित

 
Haryana Budget 2026: हरियाणा में सिंचाई व्यवस्था को नया बल, जल प्रबंधन पर बड़ा बजट आवंटित
Haryana Budget 2026: हरियाणा की रीढ़ माने जाने वाले कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य को लेकर मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने पेश किए गए बजट में सिंचाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान देते हुए 6446.57 करोड़ आवंटित किए है, जोकि पिछले वित्तवर्ष से 14.83 प्रतिशत ज्यादा है।

मुख्यमंत्री ने बजट सत्र के दौरान ने सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा रोडमैप पेश किया। उन्होंने कहा कि पानी का सही प्रबंधन ही आने वाले समय में खेती और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की असली ताकत बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2026-27 में 1500 किलोमीटर नहरों की लाइनिंग के पुनर्वास किया जाएगा। जिसमें भाखड़ा मेन ब्रांच, सिरसा ब्रांच, एनबीके लिंक चैनल, भालोट सब ब्रांच तथा हाबरी सब ब्रांच सहित लगभग 70 अन्य नहरें शामिल है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2031 तक पूरे प्रदेश में एक भी नहर ऐसी नहीं होगी जिसकी लाइनिंग का पुनर्वास शेष रह जाएगा।

उन्होंने कहा कि पर ड्रॉप मोर क्रोप प्रोग्राम के अंतर्गत ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों को प्रोत्साहन देने के लिए वर्ष 2026-27 में 1.25 लाख एकड़ अतिरिक्त क्षेत्र को शामिल किया जाएगा। साथ ही, 2,200 नए आन फार्म वाटर टैंक बनाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, पूरे प्रदेश की सभी पंचायतों से आग्रह करके हर जिले में कम से कम 100 गांवों में 2 से 10 एकड़ पंचायती भूमि पर ग्राम पंचायत को अनुदान राशि तथा एचडब्लयूआरए के सहयोग से वाटर बॉडीज बनेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण (HWRA) अति-दोहित क्षेत्रों में जल दोहन को नियंत्रित करने के साथ-साथ शुल्क से प्राप्त राशि का उपयोग नई जल संरचनाओं एवं वर्षा जल संचयन हेतु करता है। वर्ष 2026-27 में एचडब्लयूआरए द्वारा 125 करोड़ रुपये की नई जल संरचनाओं के लिए आवंटित किया है।

इसके साथ ही जल के कुशल एवं समान वितरण के लिए स्काडा प्रणाली हथनीकुंड बैराज तथा जेएलएन पम्प हाउस, सालावास की स्थापना की जा चुकी है तथा 180 स्थानों पर रियल टाइम डाटा एक्यूसिसेएशन सिस्टम (RTDAS) कार्यरत है। इन आधुनिक संचालन तकनीकों

नहरों और 620 खालों का सुधार किया जाएगा, ताकि पानी सीधे और सुचारु रूप से खेतों तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश की लगभग 2 लाख एकड़ भूमि जलभराव की समस्या से प्रभावित है। सरकार ने इस जमीन को जल निकासी सुधारकर फिर से खेती योग्य बनाने का लक्ष्य रखा है।