616 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व विधायक धर्म सिंह छोक्कर को नहीं मिली राहत, SC 17 जून को करेगा सुनवाई
नई दिल्ली: हरियाणा के पूर्व विधायक धर्म सिंह छोक्कर द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। छोक्कर पर 616 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हजारों घर खरीददार के साथ धोखाधड़ी करने और करोड़ों रुपये की अवैध हेराफेरी करने का आरोप है।
शुक्रवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को औपचारिक नोटिस जारी किए बिना याचिका को 17 जून के लिए सूचीबद्ध कर दिया। छोक्कर ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अप्रैल 2026 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और नरेंद्र हुड्डा ने छोक्कर की रिहाई की मांग की, जबकि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने इसका कड़ा विरोध किया।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की थी जमानत?
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि धर्म सिंह छोक्कर के विदेश भागने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना था कि मामले में लगे आरोप, वित्तीय लेन-देन की प्रकृति और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य इस स्तर पर जमानत देने के पक्ष में नहीं हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला महिरा ग्रुप की एक कंपनी द्वारा शुरू की गई एक किफायती समूह आवास (Affordable Housing) परियोजना से जुड़ा है। आरोप है कि छोक्कर और उनके परिवार के नियंत्रण वाली कंपनी ने हजारों घर खरीदारों से बड़ी राशि वसूली, लेकिन उस धन का उपयोग फ्लैट निर्माण के बजाय अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि धर्म सिंह छोक्कर और अन्य सह-आरोपियों ने कथित अपराध से अर्जित लगभग 616 करोड़ रुपये की रकम को विभिन्न कंपनियों और संबद्ध संस्थाओं के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग कर छिपाने का प्रयास किया। जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि इस धन का इस्तेमाल व्यक्तिगत खर्चों और संपत्तियां खरीदने में किया गया।
छोक्कर ने क्या दलील दी?
धर्म सिंह छोक्कर ने हाईकोर्ट में कहा था कि वह वरिष्ठ नागरिक हैं, समाज में उनकी गहरी जड़ें हैं और उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है। उनका यह भी तर्क था कि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में काफी समय लग सकता है, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। हालांकि, ईडी ने आरोपों की गंभीरता, जांच के दौरान उनके कथित आचरण और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में लागू कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया था।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि मुकदमे की सुनवाई शुरू होने में हुई देरी के लिए केवल अभियोजन पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने माना कि 4 मई 2025 से न्यायिक हिरासत में रहने की अवधि को भी इस मामले में पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।
अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में धर्म सिंह छोक्कर की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 17 जून को विस्तृत सुनवाई करेगा।
