किसान की बेटी ने देशभर में लहराया परचम: बीएससी नर्सिंग में ऑल इंडिया 55वीं रैंक, NEET-2026 में भी 604 अंक हासिल कर बढ़ाया मान

 
 किसान की बेटी ने देशभर में लहराया परचम: बीएससी नर्सिंग में ऑल इंडिया 55वीं रैंक, NEET-2026 में भी 604 अंक हासिल कर बढ़ाया मान

 

शक्कर मंदोरी की आरजू सहारण की दोहरी सफलता, 680 अंकों वाली परीक्षा रद्द होने के बाद भी नहीं मानी हार; 12 से 15 घंटे पढ़ाई कर हासिल किया मुकाम

नाथूसरी चौपटा। कहते हैं कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और हौसले बुलंद हों तो परिस्थितियां कभी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। इस कहावत को सच कर दिखाया है क्षेत्र के गांव शक्कर मंदोरी की होनहार बेटी आरजू सहारण ने। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली आरजू ने अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और लगन के दम पर पूरे देश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

आरजू सहारण ने ऑल इंडिया बीएससी नर्सिंग प्रवेश परीक्षा में देशभर में 55वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गांव, क्षेत्र और जिले का नाम रोशन किया है। इसके साथ ही उसने NEET-2026 में 604 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया 8779वीं रैंक हासिल की है। एक साथ दो प्रतिष्ठित परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन ने आरजू को क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा बना दिया है।

किसान की बेटी ने देशभर में लहराया परचम: बीएससी नर्सिंग में ऑल इंडिया 55वीं रैंक, NEET-2026 में भी 604 अंक हासिल कर बढ़ाया मान

आरजू ने बताया कि NEET की पहली परीक्षा में उसके 680 अंक आए थे, लेकिन बाद में वह परीक्षा रद्द हो गई। यह किसी भी विद्यार्थी के लिए बड़ा झटका हो सकता था, लेकिन उसने निराश होने के बजाय अपनी तैयारी पहले से अधिक मजबूत कर दी। दोबारा पूरी लगन से परीक्षा की तैयारी की और फिर से उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 604 अंक हासिल किए। आरजू का कहना है कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी लगातार मेहनत करते रहने से मिलती है।

उन्होंने बताया कि बीएससी नर्सिंग  लिए देशभर में करीब 1200 सीटों पर प्रवेश के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। ऐसे कड़े मुकाबले में ऑल इंडिया 55वीं रैंक प्राप्त करना उनके लिए गर्व और खुशी का विषय है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों और परिवार के निरंतर सहयोग को दिया।

रोजाना 12 से 15 घंटे की पढ़ाई बनी सफलता की कुंजी

आरजू ने बताया कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी के दौरान प्रतिदिन 12 से 15 घंटे नियमित अध्ययन किया। समय का सही प्रबंधन, लगातार अभ्यास और आत्मविश्वास ने उन्हें यह मुकाम दिलाया। उनका मानना है कि यदि लक्ष्य तय हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी सफलता दूर नहीं रहती।

खेती करने वाले पिता, स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत मां ने दिया पूरा सहयोग

आरजू के पिता सुभाष सहारण खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जबकि माता अनिता सहारण स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटी की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। माता-पिता के प्रोत्साहन और विश्वास ने आरजू को लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

दादा बोले- पोती ने पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया

आरजू के दादा भादर सहारण ने कहा कि पोती की सफलता पूरे परिवार के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि एक साथ दो बड़ी परीक्षाओं में शानदार सफलता हासिल करना आसान नहीं होता। आरजू ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत और दृढ़ संकल्प के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

गांव में खुशी का माहौल, लोगों ने दी शुभकामनाएं

आरजू की इस उपलब्धि पर गांव शक्कर मंदोरी में खुशी का माहौल है। परिजनों के साथ-साथ क्षेत्र के लोगों ने भी बेटी की सफलता पर गर्व व्यक्त किया। इस अवसर पर जगदीश सहारण, रामसिंह, प्रवीण, अशोक, शारदा, मनीष, पत्रकार सतबीर सहारण, कैमरामैन जोनी शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोगों ने आरजू सहारण को बधाई देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

आरजू की सफलता ने यह संदेश दिया है कि ग्रामीण परिवेश की बेटियां भी कठिन परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं। उनकी उपलब्धि निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ी के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगी।