हरियाणा में क्रोनिक रोगों की रोकथाम के लिए आयुष पद्धतियों पर जोर
चंडीगढ़, 11 अगस्त - हरियाणा की स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान तथा आयुष मंत्री आरती सिंह राव ने कहा है कि आयुष चिकित्सा प्रणाली असाध्य और क्रोनिक रोगों के स्थायी उपचार के साथ-साथ उनकी रोकथाम में बेहद प्रभावकारी भूमिका निभाती है। उन्होंने प्रदेश के नागरिकों से अपील की है कि वे बीमारियों के इलाज के लिए पारंपरिक एवं प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को प्राथमिकता दें ताकि स्वास्थ्य समस्याओं को जड़ से समाप्त किया जा सके।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आधुनिक जीवन शैली और दैनिक तौर-तरीकों के कारण उत्पन्न हो रही बीमारियों के चलते न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोगों का रुझान आयुष पद्धतियों (आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) की ओर तेजी से बढ़ा है। इस चिकित्सा पद्धति की निरंतर बढ़ती महत्ता और उपादेयता को देखते हुए राज्य सरकार ने हाल ही में 'राष्ट्रीय पोषण माह/सेवा पखवाड़ा' का व्यापक आयोजन किया था। इस विशेष अभियान के दौरान आयुष विभाग ने प्रदेशभर में लगभग 1,771 आयुष स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर करीब 10,900 से अधिक लोगों के स्वास्थ्य की नि:शुल्क जांच की और उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया।
प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूती देने का जिक्र करते हुए आरती सिंह राव ने विस्तृत ब्योरा साझा किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार विशेष रूप से ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा, गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य जागरूकता उपलब्ध कराने के लिए संकल्पबद्ध है।
इसी दिशा में सरकार ने राज्य में 4 बड़े आयुर्वेदिक अस्पताल (कुरुक्षेत्र में 100 बिस्तरीय, भिवानी में 25 बिस्तरीय, चरखी दादरी के गांव इमलोटा में 10 बिस्तरीय और नारनौल में 100 बिस्तरीय अस्पताल) संचालित किए हैं। इसके अलावा पलवल के सिहोल में 1 यूनानी अस्पताल और अंबाला के चांदपुरा में 1 होम्योपैथिक अस्पताल स्थापित किया गया है।
उन्होंने बताया कि आयुष ढांचे का दायरा केवल बड़े अस्पतालों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्राथमिक और सूक्ष्म स्तर पर भी इसका व्यापक प्रसार किया गया है। राज्य में 6 आयुर्वेदिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (कैथल में 2, पानीपत, रोहतक, सिरसा और जींद में 1-1 केंद्र) कार्यरत हैं। पंचकर्म चिकित्सा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार के अधीन 6 पंचकर्म केंद्र (अंबाला में 2, पंचकूला में 2, करनाल और झज्जर में 1-1) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 21 पंचकर्म केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रदेश भर में 515 आयुर्वेदिक, 16 यूनानी तथा 24 होम्योपैथिक औषधालय लोगों को सेवाएं दे रहे हैं, जबकि पंचकूला में 'भारतीय चिकित्सा एवं अनुसंधान प्रणाली संस्थान' शोध व नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है।
राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत स्थापित क्षेत्रीय स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि वर्तमान में जिला अस्पतालों में 21 आयुष विंग, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) पर 102 आयुष आईपीडी (IPD) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) पर 106 आयुष ओपीडी (OPD) के माध्यम से नागरिकों को निरंतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। इनमें से अधिकांश संस्थान ग्रामीण व दुर्गम इलाकों में कार्यरत हैं, जिससे समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित हो सकी है।
चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में हरियाणा के प्रयासों को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश कुरुक्षेत्र स्थित 'श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय' के माध्यम से आयुष शिक्षा को नया आयाम दे रहा है। राज्य में 1 सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज और 12 निजी आयुर्वेदिक कॉलेज सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं, जो गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
आरती सिंह राव ने कहा कि आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पद्धतियां भारतवर्ष में प्राचीन काल से ही सर्वस्वीकार्य रही हैं। यह हजारों वर्षों की कसौटी पर परखी और जांची हुई विधाएं हैं, जो न केवल बीमारियों का सटीक इलाज करती हैं बल्कि रोगों को फैलने से रोककर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती हैं। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे निरोगी और दीर्घायु जीवन के लिए इन प्राचीन उपचार प्रणालियों को अपनी जीवन शैली का हिस्सा बनाएं।
