हरियाणा के इन जिलों में शुरू हुई डिजिटल ग्रिड मैपिंग, इसमें AI बताएगा खेत को पानी की जरूरत है या खाद की
AI will determine the needs of the field : कृषि के क्षेत्र में विज्ञान और डेटा की भूमिका अब केवल अनुमान लगाने से कहीं आगे बढ़ने वाली है। राज्य के छह जिलों में मिट्टी की 'डिजिटल ग्रिड मैपिंग' के जरिए, मिट्टी की उर्वरता और उसमें मौजूद पोषक तत्वों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इस जानकारी को AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित तकनीक से जोड़कर, किसानों को उनके हर खेत के लिए जरूरी पोषक तत्वों के बारे में सटीक जानकारी दी जा सकेगी।
'डिस्कवरी टू डिलीवरी' (खोज से वितरण तक) मॉडल का हिस्सा यह पहल, प्रयोगशाला में विकसित तकनीकों को सीधे खेतों तक पहुँचाने का काम करेगी। यह कृषि लागत को कम करने और मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
छह जिलों में डिजिटल सॉइल ग्रिड मैपिंग
इस पहल में करनाल के अलावा कुरुक्षेत्र, अंबाला, कैथल, यमुनानगर और हिसार जिलों को शामिल किया गया है। डिजिटल सॉइल ग्रिड मैपिंग का मुख्य उद्देश्य मिट्टी से जुड़े डेटा को एक व्यवस्थित डिजिटल डेटाबेस में बदलना है।
इस प्रक्रिया में सैटेलाइट से मिले डेटा और खेतों से लिए गए मिट्टी के नमूनों के विश्लेषण को एक साथ मिलाया जाता है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में मिट्टी की गुणवत्ता, पोषक तत्वों की उपलब्धता और खेती से जुड़ी अन्य विशेषताओं को समझने में मदद मिलती है। यह तकनीक केवल सामान्य मिट्टी परीक्षण से कहीं अधिक है; यह जमीन में मौजूद विशिष्ट पोषक तत्वों की कमी के बारे में भी जानकारी देती है।
खेतों की जरूरतों के लिए AI आधारित जानकारी
डिजिटल कृषि ढांचे के भीतर, AI आधारित उपकरण किसानों को उनकी फसलों और खेतों की खास जरूरतों के हिसाब से सलाह दे सकते हैं। मिट्टी परीक्षण के नतीजों को फसल की किस्म, बुवाई के समय और पौधों के विकास के मौजूदा चरण जैसे कारकों के साथ मिलाकर, यह पता लगाया जा सकता है कि वास्तव में कितनी खाद या उर्वरक की जरूरत है। इससे यूरिया और DAP जैसे उर्वरकों के अनावश्यक इस्तेमाल को रोकने में मदद मिलेगी। इसी तरह, मौसम से जुड़ा डेटा बुवाई, सिंचाई और फसल कटाई की योजना बनाने में मददगार साबित हो सकता है।
मिट्टी और भूजल संरक्षण को बढ़ावा
जरूरत के हिसाब से ही उर्वरकों, कीटनाशकों और पानी का इस्तेमाल करने से किसानों की लागत कम होगी। इसके अलावा, पोषक तत्वों का संतुलित प्रबंधन और सही तरीके से की गई सिंचाई मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करेगी और भूजल संसाधनों पर पड़ने वाले दबाव को कम करेगी। कई अध्ययनों से पता चलता है कि डिजिटल कृषि अपनाने से खेती की लागत में 15 से 25 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है और पैदावार में 10 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
