हरियाणा में सहकारी तंत्र को मिल रही नई ताकत, 710 पैक्स के कम्प्यूटरीकरण से गांवों में बढ़ी पारदर्शिता
हरियाणा के सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि सहकारिता का मूल मंत्र ‘मैं नहीं, हम’ है। सहकारी संस्थाओं को तकनीक, पारदर्शिता, जवाबदेही और आधुनिक प्रबंधन से जोडक़र किसान, कर्मचारी, महिला और युवाओं की आर्थिक मजबूती का बड़ा आधार बनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के ‘सहकार से समृद्धि’ के मंत्र को हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में तेजी से धरातल पर उतारा जा रहा है। उन्होनें कहा कि प्रधानमंत्री का संकल्प है कि देश को वर्ष 2047 तक विकसित बनाने में सभी लोगों अहम भूमिका होगी।
डॉ. अरविंद शर्मा रविवार को अंबाला छावनी में द पोस्टल एंड आरएमएस एम्प्लॉईस कोऑपरेटिव बैंक के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बैंक के चेयरमैन सचिन खरब, निदेशक मंडल, अधिकारियों, कर्मचारियों तथा डाक एवं बीएसएनएल परिवार को संस्था की लंबी सहकारी यात्रा के लिए बधाई दी।
मंत्री ने कहा कि वर्ष 1928 में लाहौर में शुरू हुई यह सहकारी संस्था विभाजन के बाद 1947 में अंबाला छावनी आई और आज करीब एक शताब्दी की विरासत अपने साथ लेकर आगे बढ़ रही है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली तक डाक एवं बीएसएनएल विभाग के 13 हजार से अधिक स्थायी कर्मचारियों का इससे शेयरधारक के रूप में जुडऩा सहकारिता की ताकत को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सदस्य को आवश्यकता के समय तुरन्त 11 लाख रुपये तक की ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था संस्था की सदस्य हित की भावना को दर्शाती है। बच्चों की शिक्षा, विवाह, मकान अथवा आकस्मिक जरूरत के समय अपनी सहकारी संस्था जब कर्मचारी के साथ खड़ी होती है तो वह केवल बैंक नहीं, बल्कि परिवार के सहयोगी की भूमिका निभाती है।
डॉ. शर्मा ने कहा कि हरियाणा में पैक्स को केवल खाद और ऋण वितरण तक सीमित रखने के बजाय बहुउद्देशीय बनाया जा रहा है, 710 पैक्स के कम्प्यूटरीकरण, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र और सामान्य सेवा केंद्र जैसी सुविधाओं के जरिए गांवों में सहकारी संस्थाओं को सेवाओं का मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। हैफेड और अन्य सहकारी संस्थाएं किसानों की फसल खरीद तथा खाद उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, जबकि दुग्ध सहकारिता हजारों पशुपालक परिवारों को बाजार से जोड़ रही है। उन्होंने हरियाणा की पहचान से सहकारिता को जोड़ते हुए कहा, दूध-दही का खाना, यो सै म्हारा हरियाणा। हमारा प्रयास है कि दूध-दही की यही ताकत सहकारिता के माध्यम से पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक समृद्धि की ताकत भी बने। सहकारिता मंत्री ने बैंक प्रबंधन से सदस्य हित को प्रत्येक निर्णय के केंद्र में रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान निदेशक मंडल के प्रयासों से पिछले करीब दो वर्षों में बैंक की कार्यशील पूंजी में लगभग 200 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। किसी सहकारी संस्था की सबसे बड़ी पूंजी उसकी बैलेंस शीट से भी बढक़र सदस्यों का विश्वास होता है। इस विश्वास को पारदर्शिता और बेहतर सेवाओं से और मजबूत किया जाना चाहिए।
डॉ. शर्मा ने डाक कर्मचारियों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि बदलते समय और तकनीक के बावजूद डाक विभाग के प्रति समाज का भरोसा कायम है। एक दौर में गांव का डाकिया केवल चिठ्ठी नहीं, बल्कि परिवारों की खुशियां और संदेश लेकर आता था। उसी भरोसे को यह बैंक आर्थिक सहयोग और सहकारिता की शक्ति के साथ आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार और सहकारिता विभाग सकारात्मक प्रयास करने वाली सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाने में हरसंभव सहयोग के लिए तत्पर हैं। हमारा लक्ष्य है कि हरियाणा की सहकारी संस्थाएं सेवा, पारदर्शिता, आधुनिक तकनीक और सदस्य हित के मामले में देश के सामने उदाहरण बनें।
