मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 11 पंजीकृत गौशालाओं के लिए 70 लाख 24 हजार रुपये की चारा अनुदान राशि के चैक किए वितरित
चंडीगढ़, 5 मई -- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश को बेसहारा गौवंश से मुक्त करना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए दो गौ अभ्यारण्यों की स्थापना की गई है। एक जिला पानीपत के गांव नैन और दूसरा जिला हिसार के गांव ढंढुर में बनाया गया है। इनमें शैड, पानी, चारे की व्यवस्था की गई है। इनके लिए 8 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेसहारा गौवंश के पुनर्वास के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में 51 गौशालाओं को शैड बनाने के लिए 10 लाख रुपये प्रति गौशाला अनुदान देने का प्रावधान किया है। इनमें से 21 गौशालाओं में शैड बनाने हेतु अनुदान दिया जा चुका है। इसी तरह पंचगव्य आधारित उत्पादों पर अनुसंधान और विकास के लिए हरियाणा गौवंश अनुसंधान केंद्र सुखदर्शनपुर पंचकूला की स्थापना की गई है।
मुख्यमंत्री मंगलवार को कुरुक्षेत्र के लाडवा में श्री कृष्ण गौशाला सोसायटी में गौशाला चारा अनुदान राशि वितरण समारोह में बोल रहे थे। मुख्यमंत्री ने हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद उपाध्यक्षा श्रीमती सुमन सैनी के साथ गौशाला में गौ पूजा की। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में लाडवा व थानेसर हल्के की 11 पंजीकृत गौशालाओं के लिए 70 लाख 24 हजार रुपये की चारा अनुदान राशि के चैक वितरित किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गौशालाओं के लिए चारा अनुदान राशि वितरण समारोह हमारी संस्कृति, हमारी सेवा और समर्पण भावना से जुड़ा हुआ कार्यक्रम है। आज फिर मुझे गौमाता की सेवा का अवसर मिला है। आज की 11 पंजीकृत गौशालाओं के लिए 70 लाख 24 हजार रुपये की चारा अनुदान राशि को मिलाकर वर्ष 2025-26 में पूरे प्रदेश की 619 पंजीकृत गौशालाओं के लिए कुल 228 करोड़ 58 लाख रुपये की चारा अनुदान राशि जारी की जा चुकी है। पंजीकृत गौशालाओं को पिछले सवा 11 वर्षों में 526 करोड़ 45 लाख रुपये की चारा अनुदान राशि दी जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि वेदों में गाय की महिमा का व्यापक रूप से वर्णन मिलता है। हमारे वेदों और पुराणों ने गाय को समृद्धि, शांति और जीवन का आधार माना है। गौ सेवा, गौ पालन और गौ रक्षा का किसी न किसी रूप में हमारे धर्म-ग्रन्थों में उल्लेख मिलता है। हमारे देश में गाय आदिकाल से ही पूजनीय रही है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, गाय में सभी देवी-देवता निवास करते हैं। गाय को आध्यात्मिक और दिव्य गुणों की स्वामिनी भी कहा गया है। हमारे ग्रंथों ओर वेदों में कहा जाता है कि देवताओं और असुरों के बीच हुए समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों में से एक कामधेनु गाय थी। गाय के इसी महत्व को देखते हुए धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों द्वारा गौशालाओं की स्थापना पर बल दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने भी गौशालाओं के विकास, गौवंश संरक्षण और प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। वर्ष 2026-27 के बजट में 7 नए राजकीय पशु औषधालय खोलने का प्रावधान किया है। इनमें मुस्नोता, नांगल जाट, शिव गौशाला (मतलौडा), मोर खेड़ी, बलौली, दहिमन, गौ-अभ्यारण (नैन) शामिल हैं। इसके अलावा कारी आदू, ढूंढ़वा, मोहम्मदपुर अहीर व ममरिया आसमपुर में 4 नए राजकीय पशु चिकित्सालय खोले जाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 तक हरियाणा में 215 पंजीकृत गौशालाओं में केवल 1 लाख 75 हजार गौवंश था, लेकिन इस समय राज्य में 697 पंजीकृत गौशालाएं हैं। इनमें लगभग 4 लाख से अधिक बेसहारा गौवंश का पालन-पोषण हो रहा है।
उन्होंने कहा कि पंजीकृत गौशालाओं में से 330 गौशालाओं में सोलर ऊर्जा प्लांट लगाए गए हैं। वर्ष 2026-27 में प्रदेश की सभी पंजीकृत गौशालाओं को सौर ऊर्जा आधारित परिसरों में परिवर्तित किया जाएगा। सरकार गौशालाओं में 2 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध करवा रहे हैं। पहले गौशालाओं से जमीन की रजिस्ट्री पर 1 प्रतिशत शुल्क लिया जाता था, लेकिन अब नई गौशालाओं को जमीन की रजिस्ट्री पर कोई भी स्टाम्प ड्यूटी नहीं देनी पड़ती। उन्होंने कहा कि गौशालाओं में गौवंश के स्वास्थ्य की जांच के लिए हमने पशुचिकित्सों की व्यवस्था की है। हमने तीन हजार से अधिक गौवंश वाली गौशालाओं में सप्ताह में एक दिन पशुचिकित्सक की ड्यूटी लगाने का काम किया है। इसके अलावा तीन हजार से कम गायों वाली गौशालाओं में सप्ताह में एक दिन वी.एल.डी.ए. की ड्यूटी लगाई है। इसके साथ ही मोबाइल पशु चिकित्सालय की सेवाएं भी गौशालाओं के लिए उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि गौ माता को पहले जैसा सम्मान दिलाने के लिए हमें देशी नस्ल की गायों के संरक्षण व संवर्धन के लिए भी कारगर कदम उठाने होंगे। इस दिशा में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देशी नस्ल की गायों के संरक्षण और संवर्धन के लिए 'राष्ट्रीय गोकुल मिशन' लागू किया है। उन्होंने कहा कि देशी नस्ल की हरयाणा, साहीवाल व बेलाही गायों के गौपालकों को दूध उत्पादन की क्षमता के अनुसार 5 हजार से 20 हजार रुपये तक प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। हम गौशालाओं में आश्रित गौवंश की नस्ल सुधार के लिए भी प्रयास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कों पर विचरण कर रहे बेसहारा गौवंश को पकड़कर अपनी गौशाला में लाने पर गौशाला को 300 रुपये प्रति बछड़ा व बछड़ी, 600 रुपये प्रति गाय तथा 800 रुपये प्रति नंदी (सांड) मानदेय देने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए 4 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। सरकार द्वारा गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यापक प्रयास किये जा रहे हैं। गौशालाएं गाय के गोबर और गोमूत्र से प्राकृतिक फिनाइल, फॉस्फेट से भरपूर जैविक खाद, गोबर के बर्तन, गोबर से प्राकृतिक पेंट, गमला, दीया, धूप, साबुन और अन्य उत्पाद बना रही हैं। उन्होंने कहा कि पंचगव्य उत्पादन के लिए गौशालाओं की मांग अनुसार आवश्यक मशीनरी की खरीद के लिए मदद दी जा रही है। गाय के गोबर से डंडे, धूप बत्ती, उपले गमले की मशीन या गौ मूत्र से गौ अर्क, गोनाईल आदि बनाने की मशीनों पर 101 गौशालाओं को अनुदान राशि दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने गौमाता की सुरक्षा के लिए एक सख्त कानून "हरियाणा गौ-वंश संरक्षण व गौसंवर्धन अधिनियम-2015 लागू किया है। इस कानून में गौ हत्या करने वाले व्यक्ति को 10 वर्ष तक का कारावास तथा अवैध गौ तस्करी करने वाले व्यक्ति को सात वर्ष तक की कैद का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि गौशालाओं के संचालन में समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार सहयोग कर सकती है, संसाधन दे सकती है, लेकिन सेवा और समर्पण समाज के सहयोग से ही संभव है। मैं सभी पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों और युवाओं से आग्रह करता हूं कि वे अपने गांव की गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल करें।
इस मौके पर पूर्व राज्यमंत्री श्री सुभाष सुधा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
