हरियाणा में नहीं रूकेगा बुलडोजर एक्शन, कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार
मिली जानकारी के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले का निपटारा करते हुए यह भी कहा कि याचिकाकर्ता उसी दिन हाईकोर्ट में मामले का तत्काल उल्लेख कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि इस मामले की सुनवाई दोपहर 1 बजे या फिर लंच के तुरंत बाद 1:45 बजे की जाए। Haryana News
हाईकोर्ट के आदेश
जानकारी के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कोर्ट को बताया कि स्थानीय अधिकारी बिना कोई कारण बताओ नोटिस दिए ही मकानों को तोड़ने की कार्रवाई कर रहे हैं। उनका कहना था कि हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश की गलत व्याख्या करके यह अभियान चलाया जा रहा है। Haryana News
मिली जानकारी के अनुसार, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अधिकारियों द्वारा हाईकोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या की जा रही है, तो इस बारे में फैसला करने का अधिकार भी हाईकोर्ट के पास ही हैा। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि अनाधिकृत निर्माण रोकने के लिए कार्रवाई की जा रही है, तो सुप्रीम कोर्ट को उसमें बाधा नहीं डालनी चाहिए।
जानें क्या है पूरा मामला...
जानकारी के मुताबिक, 2 अप्रैल को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार की 'स्टिल्ट+4 मंजिला' भवन नीति पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इस नीति के तहत स्टिल्ट पार्किंग के ऊपर चार मंजिल बनाने की अनुमति दी गई थी, जबकि पहले अधिकतम तीन मंजिल की अनुमति थी। Haryana News
मिली जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट ने चिंता जताई थी कि ज्यादा राजस्व कमाने के लिए सार्वजनिक सुरक्षा से समझौता किया जा सकता है। इसके बाद राज्य सरकार ने गुरुग्राम से शुरू करते हुए अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू कर दिया।
यहां पढ़िए स्टिल्ट+4 नीति का पूरा इतिहास
मिली जानकारी के अनुसार, विधानसभा में सरकार द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, हरियाणा में आवासीय भूखंडों में तीन स्वतंत्र मंजिलों के पंजीकरण में लगभग 2009 में तेजी आई, जब एक नीति तैयार की गई थी। दिल्ली में चार मंजिला मकानों के पंजीकरण की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही हरियाणा के शहरों में भी ऐसी ही नीतियों की मांग बढ़ने लगी। Haryana News
जानकारी के मुताबिक, 2017 और 2018 के बीच चार मंजिला मकानों के पंजीकरण की मांग में तेजी आई। सरकार के अनुसार, 21 नवंबर 2018 को आवासीय भूखंडों पर चार मंजिला मकानों के पंजीकरण की अनुमति देने का नीतिगत निर्णय लिया गया। इसे पूरे राज्य में लागू किया गया और सभी आवासीय भूखंड इसके दायरे में आ गए। Haryana News
मिली जानकारी के अनुसार, 22 फरवरी 2023 को, विभिन्न शहरों में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद, चार मंजिला इमारत के निर्माण की अनुमति देने वाली नीति को रोक दिया गया। एक चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया, जिसने कुछ शर्तें रखीं। Haryana News
जानकारी के मुताबिक, इसके बाद, सरकार ने 2 जुलाई, 2024 को एक नीति जारी की, जिसके तहत उन भूखंड मालिकों को पात्र घोषित किया गया, जिनके लेआउट प्लान में मूल रूप से तीन मंजिलों का निर्माण संभव था और जिनके आवासीय भूखंडों तक 10 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों के माध्यम से पहुंच थी। मालिकों को पड़ोसी भूखंड मालिकों से NOC (आवेदन स्वीकृति प्रमाण पत्र) प्रस्तुत करना आवश्यक था।
