अशोक खेमका को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, केंद्र के भेदभावपूर्ण फैसले पर उठाए सवाल
CAT के फैसले को दी थी चुनौती
अशोक खेमका ने जुलाई 2023 में Central Administrative Tribunal द्वारा पारित तीन आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। CAT ने उनकी उस मांग को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने सेवानिवृत्ति से पहले भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव/सचिव स्तर पर एम्पैनल्ड माने जाने की मांग की थी।
क्या था विवाद?
नियमों के अनुसार किसी IAS अधिकारी को अतिरिक्त सचिव/सचिव स्तर पर एम्पैनलमेंट पाने के लिए केंद्र सरकार में उप सचिव (Deputy Secretary) या उससे ऊपर के पद पर कम से कम तीन वर्ष की प्रतिनियुक्ति (Central Deputation) का अनुभव होना जरूरी है। हालांकि अदालत ने पाया कि केंद्र सरकार के पास इस शर्त में छूट देने का अधिकार है और पहले भी कई अधिकारियों को यह राहत दी जा चुकी है।
तमिलनाडु कैडर के अधिकारी को मिली थी छूट
अदालत ने अपने फैसले में 1992 बैच के एक तमिलनाडु कैडर IAS अधिकारी का उदाहरण दिया, जिसे 7 मार्च 2022 को पात्रता शर्तों में छूट देकर अतिरिक्त सचिव/सचिव स्तर पर एम्पैनलमेंट दिया गया था। यह फैसला खेमका के दावे को 2021 में खारिज किए जाने के बाद लिया गया था।
अदालत ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि जब केंद्र सरकार समान परिस्थितियों वाले अन्य अधिकारियों को तीन वर्ष की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की शर्त में छूट दे सकती है, तो खेमका को वही लाभ न देना स्पष्ट रूप से भेदभाव है। अदालत ने माना कि यह संविधान के Article 14 और Article 16 में प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन है। इसलिए खेमका को भी अन्य समान अधिकारियों के बराबर लाभ दिया जाना चाहिए।
सेवानिवृत्ति के कारण सीमित रहेगा लाभ
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अशोक खेमका पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। चूंकि एम्पैनलमेंट का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों को केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त करना होता है, इसलिए उन्हें सेवा संबंधी वास्तविक लाभ नहीं मिल सकता। फिर भी रिकॉर्ड और भविष्य के सभी उद्देश्यों के लिए उन्हें एम्पैनल्ड अतिरिक्त सचिव/सचिव माना जाएगा।
