क्या हरियाणा में सरकारी वकीलों के सेवा नियम देश की संसद द्वारा पारित कानून से भी ऊपर ?

 

 

क्या हरियाणा में सरकारी वकीलों के सेवा नियम देश की संसद द्वारा पारित कानून से भी ऊपर ?

 

भारतीय  संसद द्वारा 50 वर्ष पूर्व अक्टूबर,1976 में अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में संशोधन कर हटा दिया गया  अटॉर्नी (न्यायवादी) शब्द हालांकि हरियाणा अभियोजन विधिक सेवा के ग्रुप (ए) और ग्रुप (बी) सेवा  नियमों में आज तक इसका किया जा रहा उल्लेख  

 

आगामी 10 से 18 अक्टूबर तक हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी (ए.डी.ए.) के 255 पदों के लिए निर्धारित साक्षात्कार से ठीक पहले हाईकोर्ट एडवोकेट ने प्रदेश सरकार नोटिस भेज उठाया मामला

 

 

 सरकारी वकीलों के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता (सी.पी.सी.), 1908 में सिविल अदालतों में गवर्नमेंट प्लीडर (G.P.) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बी.एन.एस.एस.), 2023 में क्रिमिनल अदालतों  में पब्लिक प्रासीक्यूटर (PP) शब्द  का उल्लेख – हेमंत कुमार

 

चंडीगढ़ --- हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) द्वारा आगामी 10 से 18 अक्टूबर तक असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी (ए.डी.ए.) अर्थात सहायक जिला न्यायवादी के 255 पदों पर चयन के लिए निर्धारित साक्षात्कार (इंटरव्यू)  से पहले  प्रदेश सरकार की   नियमित सेवा में कार्यरत लॉ ऑफिसर्स (विधि अधिकारियों) के पदनाम में गत कई दशकों से  प्रयोग  किए जा रहे अटॉर्नी (न्यायवादी) शब्द/पदनाम  को लेकर कानूनी सवाल एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

 

 

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट तथा विधि-विधायी मामलों के जानकार हेमंत कुमार, जो गत कई वर्षो से इस विषय  को मुखर तौर पर उठाते रहे है, ने हाल ही  में  एक बार पुन: इस मामले में हरियाणा के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, गृह सचिव, एडवोकेट जनरल,  विधि-परामर्शी (एल.आर.), निदेशक-अभियोजन (प्रॉसिक्यूशन) को नोटिस भेजकर  डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी- डी.ए. (जिला न्यायवादी), डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी- डी.डी.ए. (उप जिला न्यायवादी), असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी-ए.डी.ए., (सहायक जिला न्यायवादी) जैसे पदनामों की वैधानिक स्थिति स्पष्ट करने की अपील  की है ।

 

हरियाणा  अभियोजन विधिक   सेवा (ग्रुप बी  ) सेवा नियम, 2001, जो सहायक जिला न्यायवादी-ए.डी.ए. पर लागू होते हैं एवं हरियाणा अभियोजन विधिक (ग्रुप ए) सेवा नियम, 2013 जो जिला न्यायवादी-डी.ए. और उप जिला न्यायवादी- डी.डी.ए.  पर लागू होते हैं में स्पष्ट तौर पर अटॉर्नी शब्द का प्रयोग किया गया है.

 

चूँकि हरियाणा के अतिरिक्त पडोसी पंजाब राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (यू.टी.) चंडीगढ़ की नियमित  सरकारी सेवा में कार्यरत सरकारी वकीलों के पदनाम में उपरोक्त अटॉर्नी(न्यायवादी) शब्द का प्रयोग किया जाता है, अत: उन्हें भी साथ साथ नोटिस भेजा गया है.

 

 

हेमंत का कहना है कि देश की संसद द्वारा  आज से 50 वर्ष पूर्व  अक्टूबर, 1976 में अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961) में संशोधन कर अटॉर्नी (Attorney) अर्थात न्यायवादी  शब्द को कानून से पूरी तरह हटा दिया था। इसके बाद से हमारे देश  में केवल दो श्रेणियों के वकीलों —एडवोकेट और सीनियर एडवोकेट—को ही कानूनी मान्यता प्राप्त है। ऐसे में किसी भी सरकारी या निजी एडवोकेट  के लिए "अटॉर्नी" शब्द का प्रयोग विधिसम्मत नहीं है.

 

'अदालतों में भी नहीं चलता अटॉर्नी शब्द'

नोटिस में उल्लेख किया  गया है कि हरियाणा सरकार की नियमित सेवा में नियुक्त इन सरकारी वकीलों को नियुक्ति के समय अलग-अलग अधिसूचनाओं के माध्यम से सिविल मामलों के लिए 'गवर्नमेंट प्लीडर (Government Pleader)' तथा फौजदारी मामलों के लिए 'लोक अभियोजक (Public Prosecutor)' के रूप में अधिकृत किया जाता है।

व्यवहारिक रूप से भी ये अधिकारी अदालतों में Government Pleader (GP) अथवा Public Prosecutor (PP) के रूप में ही कार्य करते हैं और उसी पदनाम से हस्ताक्षर करते हैं। न्यायालयों की किसी भी कार्यवाही में "Attorney" शब्द का उपयोग नहीं किया जाता।

'केंद्र सरकार में भी नहीं है ऐसा कोई पदनाम'

हेमंत ने कहा कि भारत सरकार के किसी भी मंत्रालय, विभाग या कार्यालय में कार्यरत विधि अधिकारियों के पदनाम में "Attorney" शब्द का प्रयोग नहीं किया जाता। वहां Law Officer, Legal Adviser, Government Counsel, Public Prosecutor जैसे पदनाम ही प्रचलित हैं।

उनका कहना है कि जब केंद्र सरकार तक अपने नियमित विधि अधिकारियों के लिए Attorney शब्द का प्रयोग नहीं करती, तब हरियाणा सरकार द्वारा इसका उपयोग जारी रखना कानून और स्थापित परंपरा—दोनों के विपरीत है।

संविधान में केवल 'अटॉर्नी जनरल' का ही उल्लेख

नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 76 में केवल Attorney General for India (भारत के महान्यायवादी) का संवैधानिक पद ही मान्य है, जिसकी नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं और जो देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है।

हेमंत ने कहा कि संविधान या किसी अन्य कानून में Additional Attorney General, Deputy Attorney General, Assistant Attorney General, District Attorney अथवा Deputy District Attorney जैसे पदों का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है।

हरियाणा के एडवोकेट जनरल कार्यालय में भी नहीं है 'अटॉर्नी'

हेमंत ने यह भी इंगित किया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट स्थित हरियाणा के एडवोकेट जनरल कार्यालय में अनुबंध आधार पर नियुक्त सरकारी वकीलों के लिए Senior Additional Advocate General, Additional Advocate General, Senior Deputy Advocate General, Deputy Advocate General और Assistant Advocate General जैसे पदनाम निर्धारित हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद वर्ष 2016 में हरियाणा विधानसभा द्वारा पारित हरियाणा लॉ ऑफिसर्स (एंगेजमेंट) अधिनियम, 2016 में भी कहीं "Attorney" शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है।

'सेवा नियमों में संशोधन कर बदले जाएं पदनाम'

हेमंत ने नोटिस में अपील  की है कि हरियाणा सरकार अपने नियमित सरकारी वकीलों के सेवा नियमों की समीक्षा कर "Attorney" शब्द को हटाए तथा उसकी जगह Government Advocate, Government Pleader, Public Prosecutor अथवा Law Officer जैसे विधिसम्मत पदनाम अपनाए जाएं, ताकि राज्य की सेवा नियमावली को Advocates Act, 1961 तथा वर्तमान कानूनी व्यवस्था के अनुरूप बनाया जा सके।