सैलरी नहीं मिलने से नाराज डॉक्टर गए हड़ताल पर, मरीजों की बढ़ी परेशानी 

कुरुक्षेत्र: पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिलने से नाराज मिरी-पिरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (एमपीआईएमएसआर), शाहाबाद मारकंडा के विशेषज्ञ डॉक्टर सोमवार को एक दिन के सामूहिक अवकाश पर चले गए। डॉक्टरों के इस कदम से अस्पताल की ओपीडी सेवाएं बंद रहीं, हालांकि इमरजेंसी, आईपीडी और ऑन-कॉल सेवाएं जारी रहीं। डॉक्टरों के समर्थन में नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों ने भी चेतावनी दी है कि यदि जल्द वेतन का भुगतान नहीं किया गया तो वे अगले सप्ताह से हड़ताल पर जा सकते हैं।
 
सैलरी नहीं मिलने से नाराज डॉक्टर गए हड़ताल पर, मरीजों की बढ़ी परेशानी

कुरुक्षेत्र: पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिलने से नाराज मिरी-पिरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (एमपीआईएमएसआर), शाहाबाद मारकंडा के विशेषज्ञ डॉक्टर सोमवार को एक दिन के सामूहिक अवकाश पर चले गए। डॉक्टरों के इस कदम से अस्पताल की ओपीडी सेवाएं बंद रहीं, हालांकि इमरजेंसी, आईपीडी और ऑन-कॉल सेवाएं जारी रहीं। डॉक्टरों के समर्थन में नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों ने भी चेतावनी दी है कि यदि जल्द वेतन का भुगतान नहीं किया गया तो वे अगले सप्ताह से हड़ताल पर जा सकते हैं।

 

संविदा कर्मचारियों का कहना है कि लगातार वेतन में देरी के कारण उनके लिए काम जारी रखना मुश्किल हो गया है और वे अनुबंध नवीनीकरण पर भी पुनर्विचार कर रहे हैं। वहीं, ठेकेदार के बकाया भुगतान के कारण मेडिकल कॉलेज भवन का निर्माण कार्य भी ठप पड़ गया है। अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि संस्थान की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 600 मरीज आते हैं। वेतन नहीं मिलने के बावजूद डॉक्टरों ने पिछले महीने 13,500 से अधिक मरीजों का उपचार किया और 300 से ज्यादा सर्जरी कीं।

प्रबंधन को लेकर विवाद से बढ़ा संकट

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के बाद हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (एचएसजीएमसी) के नेताओं ने अस्पताल का दौरा कर सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि समिति संस्थान का प्रबंधन अपने हाथ में लेगी। हालांकि अब तक औपचारिक रूप से प्रबंधन हस्तांतरण नहीं हुआ है। इस बीच एचएसजीएमसी द्वारा स्वामित्व का दावा किए जाने के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने संस्थान को वित्तीय सहायता देना बंद कर दिया है। इसके चलते कर्मचारियों के वेतन के साथ-साथ अन्य विक्रेताओं और ठेकेदारों का भुगतान भी अटक गया है।

डॉक्टरों ने पहले भी उठाया था मुद्दा

डॉक्टरों ने पिछले महीने एचएसजीएमसी अध्यक्ष जगदीश सिंह झिंडा को ज्ञापन सौंपकर लंबित वेतन और अन्य समस्याओं के समाधान की मांग की थी। उन्हें आश्वासन दिया गया था कि इस विषय पर बैठक कर निर्णय लिया जाएगा, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। कई बैठकों में समिति के सदस्य भी नहीं पहुंचे। जवाब न मिलने पर डॉक्टरों ने सामूहिक अवकाश का फैसला लिया।

400 कर्मचारियों का भविष्य दांव पर

जानकारी के अनुसार संस्थान में करीब 400 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें लगभग 40 डॉक्टर शामिल हैं। अस्पताल का मासिक वेतन व्यय करीब 1.7 करोड़ रुपये है। वहीं, निर्माण कार्य पूरा करने के लिए लगभग 104 करोड़ रुपये और मौजूदा वित्त वर्ष में अस्पताल के सुचारु संचालन के लिए करीब 20 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। मिरी-पिरी इंस्टीट्यूट के सीईओ संदीप इंदर सिंह चीमा ने कहा कि लंबित वेतन के कारण डॉक्टरों और कर्मचारियों में अनिश्चितता का माहौल है। उन्होंने डॉक्टरों से सेवाएं बहाल करने की अपील करते हुए कहा कि अस्पताल के संचालन को सामान्य बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

 

वहीं, एचएसजीएमसी नेता और ट्रस्ट कार्यसमूह सदस्य बलदेव सिंह कैंपूर ने कहा कि कुछ नेताओं के बीच चल रहे विवाद और पर्याप्त बजट की कमी का असर अस्पताल के कामकाज पर पड़ने लगा है। दूसरी ओर, मिरी-पिरी ट्रस्ट के सचिव सुखमिंदर सिंह ने कहा कि यदि एचएसजीएमसी संस्थान को चलाने के लिए आर्थिक सहायता नहीं दे सकती तो इसे लिखित रूप में स्पष्ट करे, ताकि एसजीपीसी दोबारा वित्तीय सहायता उपलब्ध करा सके। अस्पताल में वेतन संकट और प्रबंधन को लेकर जारी अनिश्चितता के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।