सिंचाई से जुड़ी लंबित समस्याओं का करें प्राथमिकता आधार पर समाधान :  श्रुति चौधरी

 
सिंचाई से जुड़ी लंबित समस्याओं का करें प्राथमिकता आधार पर समाधान :  श्रुति चौधरी

मंत्री ने की बाढ़ सुरक्षा एवं रखरखाव कार्यों की समीक्षा, भविष्य के लिए बेहतर योजना बनाने के निर्देश

 चंडीगढ़, 21 अक्टूबर

हरियाणा की सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रीमती श्रुति चौधरी ने आज यहां चरखी दादरी और भिवानी जिलों में सिंचाई से जुड़ी समस्याओं, जारी परियोजनाओं तथा प्रस्तावित विकास कार्यों की व्यापक समीक्षा करते हुए अधिकारियों को लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए।

सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री ने एलडब्ल्यूएस एवं वाईडब्ल्यूएस सर्कल, भिवानी के अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक में वन संबंधी स्वीकृतियों, पानी की चोरी रोकने, भूमि की अलाइनमेंट (संरेखण) तथा अतिक्रमण से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा कि लंबित स्वीकृतियों और अन्य समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए, ताकि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी न हो और परियोजनाओं का क्रियान्वयन सुचारू रूप से सुनिश्चित किया जा सके।

श्रीमती श्रुति चौधरी ने पिछले तीन वर्षों के दौरान किए गए बाढ़ सुरक्षा एवं रखरखाव कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने इन कार्यों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करते हुए भविष्य के लिए बेहतर योजना तैयार करने पर जोर दिया, ताकि बाढ़ सुरक्षा से संबंधित कार्यों का समयबद्ध क्रियान्वयन हो और सिंचाई ढांचे का प्रभावी रखरखाव सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक में लोहारू, भिवानी, तोशाम, बवानी खेड़ा और बाढड़ा विधानसभा क्षेत्रों में सिंचाई से संबंधित लंबित समस्याओं, चल रही परियोजनाओं तथा प्रस्तावित विकास कार्यों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि क्षेत्र की समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए तथा स्वीकृत एवं चल रही परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के अंदर पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

सिंचाई मंत्री ने कहा कि सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना, जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना तथा किसानों को सिंचाई संबंधी समस्याओं से राहत दिलाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए परियोजनाओं की नियमित निगरानी करें और जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दें।