फसल अवशेषों को आग से बचाने के लिए फाइव लेयर निगरानी कवच

 
 फसल अवशेषों को आग से बचाने के लिए फाइव लेयर निगरानी कवच

पंचायत भवन में 15 अक्टूबर को दोपहर 2.30 बजे 73 गांवों के सरपंचों को किया जाएगा अलर्ट-जिला में निगरानी के लिए 173 नोडल अधिकारी नियुक्त, हर 15 नोडल अधिकारियों पर भी एक सुपरवाईजर
भिवानी, 14 अक्टूबर।  जैसे-जैसे जिला में धान कटाई का समय नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे जिला प्रशासन भी पराली को आग से बचाने के लिए मुस्तैद हो रहा है। डीसी साहिल गुप्ता के आदेशानुसार जिला में फसल अवशेषों की निगरानी के लिए फाइव लेयर कवच बनाया गया है। जहां एक तरफ कृषि विभाग द्वारा 173 नोडल नियुक्त किए गए हैं, वहीं हर 15 नोडल अधिकारियों पर एक सुपरवाईजर भी लगाया गया है। इसी कड़ी में पंचायत भवन में 15 अक्टूबर को दोपहर 2.30 बजे एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें विशेषकर बवानीखेड़ा, भिवानी व तोशाम क्षेत्र से धान फसल उगाने वाले 73 संवेदनशील गांवों के सरपंचों को बुलाया गया है। इस कार्यक्रम में सरपंचों के अलावा ग्राम सचिव व पुलिस विभाग, राजस्व विभाग, पंचायत विभाग, शिक्षा विभाग के अधिकारी भी शामिल होंगे। जिला में धान की कटाई लगभग 20 अक्टूबर से आरंभ होने वाली है।
उल्लेखनीय है कि पराली जलाने से न केवल वातावरण प्रदूषित होता है, बल्कि भूमि की उर्वरा शक्ति भी नष्ट होती है। लाभदायक कीट-पतंगे भी मर जाते हैं। डीसी साहिल गुप्ता के निर्देशानुसार कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने जिले के धान बिजाई वाले गांवों में 173 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, जो खेतों पर चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर रखेंगे। डीसी द्वारा जिले में धारा 163 लागू कर दी गई है। इसके साथ-साथ सेटेलाईट निगरानी की जाएगी।
उप कृषि निदेशक राजेश सिहाग ने बताया कि जिले के 105 गांवों में किसानों द्वारा कुल 54,734 एकड़ क्षेत्र में धान की खेती की गई है, जिससे लगभग 82000 मीट्रिक टन पराली उत्पादन होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे। इसके तहत 5000 से 30000 रुपये तक का जुर्माना, एफआईआर, मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर रेड एंट्री दर्ज करने के साथ-साथ आगामी दो वर्षों तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का कड़ा प्रावधान किया गया है।

इस प्रकार है फाइव लेयर सुरक्षा निगरानी
कृषि अभियंता नसीब सिंह धनखड़ ने बताया कि धान बिजाई वाले 105 गांवों में प्रत्येक 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी तैनात किया गया है। 173 नोडल अधिकारियों पर भी हर 15 पर एक सुपरवाईजर नियुक्त किया गया है, जो द्वितीय श्रेणी का राजपत्रित अधिकारी है। इसी प्रकार गांव स्तर पर एन्र्फोसमेंट टीम बनाई है, जिसमें पुलिस, राजस्व विभाग, कृषि विभाग और पंचायत विभाग के अधिकारी शामिल हैं। प्रत्येक ब्लॉक में कृषि विभाग का नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। इसी प्रकार से जिला स्तर, उपमंडल स्तर, ब्लॉक स्तर के अलावा मोबाइल टीम भी बनाई गई हैं, जो पराली की निगरानी करेंगी व पराली जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। उन्होंने बताया कि 15 अक्टूबर को पंचायत भवन में होनी वाली कार्यशाला में ग्राम पंचायतों के अलावा संबंधित विभाग के अधिकारियों को भी फसल अवशेषों को आग से बचाने को लेकर जरूरी निर्देश दिए जाएंगे।