कृषि वैज्ञानिकों ने बताई सरसों की उन्नत किस्में व बिजाई का सटीक तरीका, बंपर पैदावार से निहाल हो जाएंगे किसान

 
कृषि वैज्ञानिकों ने बताई सरसों की उन्नत किस्में व बिजाई का सटीक तरीका, बंपर पैदावार से निहाल हो जाएंगे किसान​​​​​​​

रबी सीजन की प्रमुख फसलों में से एक सरसों फसल की बिजाई की शुभ घड़ियां नजदीक आ चुकी है। सरसों वर्गीय फसलों के तहत तोरिया, राया, तारामीरा, भूरी व पीली सरसों आती हैं। सरसों की बिजाई के लिए किसान खेत को अच्छे से तैयार कर लें।

सितंबर के अंत में सरसों की बिजाई शुरू हो जाती है। तिलहनों की बिजाई सिंचित क्षेत्रों में एक किलोग्राम व बारानी क्षेत्रों में सवा किलोग्राम बीज प्रति एकड़ लेकर कतारों में 45 सेंटीमीटर की दूरी पर करें। बिजाई पोरा विधि से इस प्रकार करें कि बीज 3 से 4 सेंटीमीटर से अधिक गहरा न पड़े।

इस मात्रा से डाले खाद 

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बीआर कंबोज ने बताया कि सरसों को तना गलन रोग से बचाने के लिए बिजाई से पहले बीज को 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम नामक दवा से प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से उपचारित करें। बिजाई के समय सिंचित सरसों में 35 किलोग्राम यूरिया और 75 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट प्रति एकड़ के हिसाब से खेत में पोर दें।

बाकी 35 किलोग्राम यूरिया पहली सिंचाई के समय डाल दें। बारानी इलाकों में सरसों के लिए 35 किलोग्राम यूरिया तथा 50 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट ही चुनें। यदि फास्फोरस डीएपी द्वारा डालें तो खेत को तैयार करते समय ही 100 किलोग्राम जिप्सम प्रति एकड़ बिखेर कर खेत में मिला दें।

यदि जमीन में जस्ते की कमी हो तो प्रति एकड़ बिजाई के समय 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट 20-25 किलोग्राम सूखी भुरभुरी मिट्टी में मिलाकर खेत को तैयार करते समय मिला दें। 

इन किस्मों की करें बिजाई 

सरसों अनुभाग में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राम अवतार ने बताया कि राया सरसों की RH-30, RH- 8812, RH- 406, RH- 0749, RH- 725, RH- 761, RH- 1424, RH- 1706 व पीली सरसों की किस्म Y SH- 0401 की ही बिजाई करें। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने सरसों की एक और उन्नत किस्म RH- 1975 विकसित की है। यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए एक उत्तम किस्म है। इसके अलावा सरसों की हाइब्रिड किस्म RHH- 2101 भी सिंचित क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए विकसित की गई है