ऑस्ट्रेलियन केंचुओं से किसान कर रहा सालाना डेढ़ करोड़ की कमाई, जैविक खाद की फैक्ट्री ने बदली किस्मत 

 
ऑस्ट्रेलियन केंचुओं से किसान कर रहा सालाना डेढ़ करोड़ की कमाई, जैविक खाद की फैक्ट्री ने बदली किस्मत 
Naya Haryana : आज के समय में बहुत सारे युवा बेरोजगार है उनके पास काम की कमी है लेकिन किसी को बिजनेस के बारे में नॉलेज न होने पर कमाई का कोई साधन उनके पास नहीं है। आज के दौर में जहां ज्यादा पैदावार की होड़ में खेतों में अंधाधुंध रासायनिक खाद (केमिकल फर्टिलाइजर) और कीटनाशक छिड़के जा रहे हैं, वहीं एक किसान ने जैविक खाद से अपनि किस्मत को बदल दिया है। 10 साल पहले सवा बीघा से शुरू हुआ एक छोटा सा प्रयोग आज सालाना 1.5 करोड़ रुपए के टर्नओवर में बदल चुका है।

जानकारी के मुताबिक, यह कहानी है एक ऐसे प्रगतिशील किसान की, जिन्होंने कंस्ट्रक्शन के बिजनेस के साथ-साथ पर्यावरण को बचाने का जिम्मा उठाया। चित्तौड़गढ़ के बेगूं के बिछौर गांव के रहने वाले रमेश कुमावत (38) किसान परिवार से हैं। ग्रेजुएशन करने के बाद कंस्ट्रक्शन का काम सीखा और खुद का बिजनेस शुरू किया। Organic Farming

मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2015 में भीलवाड़ा के हमीरगढ़ में कंस्ट्रक्शन का काम करते समय साइट पर पॉली हाउस में कृषि विशेषज्ञ पहुंचे। टीम ने किसान को फसल में जैविक खाद डालने की सलाह दी। इस पर किसान ने कहा कि जैविक खाद तो मिलती ही नहीं है। यहीं से उनके जीवन की दिशा बदल गई और उन्होंने कंस्ट्रक्शन के काम के साथ-साथ खेती की ओर रुख कर लिया। Vermicompost Business

जानकारी के मुताबिक, उन्होंने सोचा कि जो चीज लोगों को नहीं मिल रही है, क्यों न वही काम किया जाए। बस पिता नंदलाल कुमावत की सीख हमेशा जीवन में साथ चलती है। वो कहते हैं धोखा खाने वाला हमेशा संभल कर चलता है, लेकिन धोखा करने वाला कभी नहीं संभल सकता है। India Agriculture

बदलाव की शुरुआत

मिली जानकारी के अनुसार, प्रगतिशील किसान रमेश कुमावत बताते हैं कि कृषि वैज्ञानिक ने उन्हें वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार करने की सलाह दी थी। उन्होंने मोबाइल पर एक वीडियो दिखाया जिसमें स्ट्रक्चर तैयार करने और खाद बनाने की प्रक्रिया समझाई गई थी। शुरुआत में मन में संशय था कि अगर तैयार खाद नहीं बिकी तो क्या होगा, लेकिन कृषि वैज्ञानिक ने भरोसा दिलाया कि तुम खाद तैयार करो, आगे की जिम्मेदारी मैं लेता हूं। आज वर्मी कंपोस्ट को खरीदने के लिए लोग प्लांट पर पहुंच जाते हैं। डिमांड के अनुरूप प्रोडक्शन नहीं हो पा रहा है। Australian Earthworm

ऑस्ट्रेलिया से मंगवाए केंचुए

जानकारी के मुताबिक, रमेश कुमावत ने बताया कि उन्होंने घर के पास ही सवा बीघा खेत में स्ट्रक्चर तैयार किया। सीमेंट फर्श बनाने के बाद 20 फीट लंबी 114 क्यारियां तैयार की गईं। हर क्यारी की दीवार ईंटों से 6 इंच ऊंची और चौड़ाई 3 फीट रखी गई। मौसम से बचाव के लिए टिन शेड लगाया गया।

नवंबर 2016 में पहली बार वर्मी कंपोस्ट बनाने की शुरुआत की गई। लगभग 55 लाख रुपए की लागत से ऑस्ट्रेलिया से एसिनेया फेटिडा वैरायटी के केंचुए मंगवाए। Vermicompost Business

डेढ़ महीने में तैयार वर्मी कंपोस्ट

मिली जानकारी के अनुसार, खाद बनाने के लिए शुरुआत में दो साल तक आसपास के गांवों से सवा रुपए किलो के हिसाब से गोबर खरीदा। अब गोबर कोटा के बोरावास से मंगाया जा रहा है। वर्तमान में गोबर ट्रांसपोर्ट सहित लगभग 2 रुपए प्रति किलो की दर से आता है। शुरुआत में खाद तैयार होने में करीब 70 दिन लगे। लेकिन अब यह प्रक्रिया लगभग 45 दिन में पूरी हो जाती है।

90 टन से 60 टन वर्मी कंपोस्ट

जानकारी के मुताबिक, रमेश कुमावत बताते हैं कि एक बार में 6 ट्रक (करीब 90 टन) गोबर से खाद तैयार किया जाता है। इसमें लगभग 70 प्रतिशत तैयार खाद मिलता है। 40-40 किलो के 1500 से 1700 कट्टे खाद निकलते हैं। यानी 90 टन गोबर से लगभग 60 टन वर्मी कंपोस्ट तैयार होता है। India Agriculture

दोनों से कमाई

मिली जानकारी के अनुसार, जैविक खेती के अच्छे परिणामों के कारण अब लोग खुद उनकी फैक्ट्री पर पहुंचकर खाद खरीदते हैं। वे प्रति किलो 12.50 रुपए की दर से बिक्री करते हैं यानि 40 किलो का एक बैग 500 रुपए में बेचा जाता है। 10 किलो केंचुए का बॉक्स 2000 रुपए में बेचते हैं। इसका वजन गोबर समेत होता है। हर प्रोसेस में इनकी संख्या बढ़ जाती है। Vermicompost Business

वर्मी कंपोस्ट और वर्मी वॉश

जानकारी के मुताबिक, रमेश कुमावत बताते हैं कि वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए सबसे पहले गोबर को फैलाया जाता है ताकि उसकी गर्मी निकल जाए। इसके बाद क्यारी में लगभग 8 इंच गोबर भरा जाता है और नमी बनाए रखने के लिए पानी का छिड़काव किया जाता है। 20 फीट की क्यारी में 10 बॉक्स केंचुए छोड़े जाते हैं, जिन्हें बोरी (टाट) से ढक दिया जाता है। इसके बाद नमी बनाए रखने के लिए हल्का पानी का छिड़काव किया जाता है। वर्मी वॉश के लिए सभी क्यारियों को पाइप के जरिए टंकी से जोड़ा गया है। Australian Earthworm

नीचे जाने पर खाद

मिली जानकारी के अनुसार, रमेश कुमावत बताते हैं कि केंचुआ रात के समय ऊपर आता है और दिन में नीचे चला जाता है। इसी प्रक्रिया से खाद तैयार होती है। वर्मी कंपोस्ट को क्यारी से आधा निकाला जाता है, जिसमें केंचुए नीचे की तरफ रहते हैं। इसके बाद केंचुए मिश्रित खाद को अलग निकाला जाता है। क्यारियों में फिर से गोबर भरने के बाद केंचुए मिश्रित खाद को ऊपर डाला जाता है।