चंडीगढ़। लुधियाना में एक चौंकाने वाले साइबर अपराध का मामला सामने आया है, जहां अज्ञात ठगों ने सीबीआई (CBI) अधिकारियों के रूप में खुद को पेश करते हुए और सुप्रीम कोर्ट के फर्जी दस्तावेज बनाकर एक व्यक्ति से 7 करोड़ रुपये की ठगी कर ली।
फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश और वर्चुअल सुनवाई से रची साजिश
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में इस ठगी का मामला उस समय सामने आया जब एक आरोपी ने जमानत याचिका दायर की। न्यायमूर्ति महाबीर सिंह सिंधु की अध्यक्षता वाली बेंच को बताया गया कि अपराधियों ने एक जटिल साइबर ठगी योजना को अंजाम दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई के फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।
इस घोटाले की शुरुआत 27 अगस्त 2024 को हुई, जब पीड़ित को एक फर्जी कॉल ट्राई (TRAI) अधिकारी के नाम से आई, जिसमें उसके मोबाइल नंबर को बंद करने की धमकी दी गई। इसके बाद ठगों ने सीबीआई अधिकारी बनकर फर्जी जांच दस्तावेज दिखाए और यहां तक कि वर्चुअल कोर्ट सुनवाई का भी नाटक किया, जिसमें खुद को तत्कालीन भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ के रूप में प्रस्तुत किया।
बैंक खातों में ट्रांसफर कराए गए 7 करोड़ रुपये
पीड़ित को यह यकीन दिलाने के लिए कि वह एक गंभीर जांच के दायरे में है, आरोपियों ने फर्जी गिरफ्तारी वारंट और सुप्रीम कोर्ट के नकली आदेशभी दिखाए। डर के कारण, उसने 7 करोड़ रुपये ठगों द्वारा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।
साइबर ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी
सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति सिंधु ने भारत में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों पर चिंता व्यक्त की। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2020 से 2024 के बीच 5.82 लाख साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज हुए, जिनमें कुल 3,207 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई।
न्यायालय की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के बाद, न्यायमूर्ति महाबीर सिंह सिंधु ने कहा, “यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि आरोपी ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर पीड़ित से 7 करोड़ रुपये की ठगी की और सुप्रीम कोर्ट का फर्जी आदेश तैयार किया। इसके अलावा, प्रवर्तन निदेशालय (ED) का एक फर्जी गिरफ्तारी वारंट भी दिखाया गया, जिससे पीड़ित को यह राशि ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। यह गंभीर अपराध है और देश में साइबर धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।”
साइबर अपराध से बचने के लिए जरूरी सतर्कता
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगने में जुटे हैं। ऐसे मामलों से बचने के लिए किसी भी अज्ञात कॉल, संदिग्ध दस्तावेज या बैंक ट्रांसफर अनुरोधों पर सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।