नन्हे हाथों में लिए, क्रीम भरा कटोर।
चेहरे पर मुस्कान है, मन में मस्ती जोर।।
गालों पर क्रीम लगा, बैठा नन्हा लाल।
देख रहे हैं प्यार से, मम्मी-पापा हाल।।
नीली कमीज पहनकर, बैठा है मुस्काय।
नन्ही-नन्ही शरारतें, सबके मन को भाय।।
हाथों में है खेलना, आँखों में संसार।
बचपन की इन शरारतों, पर जाएँ हम वार।।
नन्हे कदमों से सजा, जीवन का हर द्वार।
बच्चों की मुस्कान ही, घर का सच्चा प्यार।।
मासूमों की हँसी में, छिपा खुशी का राज।
इनके संग हर दिन लगे, जैसे हो त्योहार।।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
(डॉ. सत्यवान सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), एक कवि और सामाजिक विचारक है।)
