नफरत लिए बिसात पर, खेल रहे कुछ खेल।
देशप्रेम की शक्ति से, टूटे उनका मेल॥
माटी का सम्मान ही, अपना धर्म महान।
देशहितों से बढ़ नहीं, कोई अपना मान॥
भारत की संतान हैं, भारत अपनी शान।
देशविरोधी सोच का, मिलकर करें निदान॥
जो धरती का मान ना, उसका कैसा मान।
देशहितों से ही बने, जन-जन की पहचान॥
देश-विरोधी चाल को, समझ समय के साथ।
जाग्रत प्रहरी देश के, थामें सच का हाथ॥
झूठे वादों से सदा, करते जन गुमराह।
सत्य-सजग नागरिक ही, रोकें उनकी राह॥
देशप्रेम की लौ जले, मिटे घृणा का भाव।
एकजुटता से देश में, महके प्रेम-स्वभाव॥
राष्ट्रहितों को भूलकर, जो करते नुकसान।
जनता जगे विवेक से, हो उनकी पहचान॥
देश हमारा मान है, देश हमारा प्राण।
इसकी रक्षा में रहे, रखे सभी हम ध्यान॥
भारत की बुनियाद को, मिलकर रखें सँभाल।
एकजुटता से देश का, हो उज्ज्वल हर काल॥
-डॉ. प्रियंका सौरभ
