Central Employees: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! सरकार ने किया ये ऐलान
यह फैसला केंद्र सरकार के कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करता है। कर्मचारी लंबे समय से यह मांग कर रहे थे कि उन्हें भी गैर-सरकारी कर्मचारियों की तरह पेंशन योजनाओं में अधिक निवेश विकल्प उपलब्ध कराए जाएं। अब इन नए प्रावधानों के लागू होने के बाद, सरकारी कर्मचारियों को अपने सेवानिवृत्ति कोष को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने का अवसर मिलेगा।
एनपीएस और यूपीएस के तहत अब कर्मचारियों को कई विकल्प मिलेंगे। पहला है डिफॉल्ट स्कीम, जिसमें निवेश का पैटर्न समय-समय पर पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा तय किया जाता है। दूसरा विकल्प स्कीम-जी है, जिसमें 100 प्रतिशत निवेश सरकारी प्रतिभूतियों में किया जाता है, जिससे जोखिम कम रहता है और रिटर्न अपेक्षाकृत स्थिर मिलता है।
नए निवेश विकल्पों में ‘लाइफ साइकल’ और ‘बैलेंस्ड लाइफ साइकल’ को शामिल किया गया है। लाइफ साइकल विकल्प के अंतर्गत निवेशक की उम्र बढ़ने के साथ इक्विटी निवेश का प्रतिशत स्वतः घटता जाता है। उदाहरण के तौर पर, एलसी-25 में अधिकतम 25 प्रतिशत इक्विटी आवंटन होता है, जबकि एलसी-50 में यह सीमा 50 प्रतिशत और एलसी-75 में 75 प्रतिशत होती है। यह आवंटन 35 वर्ष की आयु से शुरू होकर 55 वर्ष की आयु तक धीरे-धीरे घटता जाता है।
बैलेंस्ड लाइफ साइकल (बीएलसी) विकल्प एलसी-50 का संशोधित रूप है, जिसमें इक्विटी का अनुपात 45 वर्ष की आयु से कम होना शुरू होता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारियों को लंबी अवधि तक इक्विटी मार्केट के ग्रोथ का लाभ देना है, साथ ही रिटायरमेंट के करीब पहुंचते-पहुंचते जोखिम को सीमित करना है।
