Haryana: हरियाणा के चरखी दादरी में 29 साल पहले दो विमानों के बीच हुई टक्कर से जुड़ी यादें अहमदाबाद में हुए विमान हादसे के बाद एक बार फिर लोगों के जहन में ताजा हो गई हैं। उस समय दादरी के विमान हादसे के बाद भी करीब एक सप्ताह तक शवों की पहचान करने की समस्या बनी रही थी। उस समय हादसें में मृतक 118 लोगों की पहचान होने पर उनके शव स्वजनों को सौंप दिए गए थे। लेकिन ज्यादातर की पहचान नहीं हो पाई थी।
51 मृतकों के शव नहीं मिलने की भी बात कही गई
यहां तक की 51 मृतकों के शव नहीं मिलने की भी बात कही गई। इसे लेकर कई दिनों तक असमंजस की स्थिति बनी रही थी। उल्लेखनीय है कि 29 साल पहले 12 नंवबर 1996 को संसार की बड़ी हवाई दुर्घटनाओं में शुमार किए जाने वाला एक हादसा दादरी के समीपवर्ती गांव में भी हुआ था। यहां दिल्ली से लौट रहे सऊदी अरब एयरलाइंस की फ्लाइट 763 बोइंग और दिल्ली आ रही कजाकिस्तान एयरलाइंस की फ्लाइट 1907 दादरी नगर के समीप के गांव टिकान कलां के आसमान में टकरा गई थी। दोनों विमानों में क्रू मेंबर्स सहित 349 लोग सवार थे। इन सभी की जिंदा जलने, अंगभंग होने से मौत हो गई थी। विमान हादसे के बाद दादरी के नागरिक अस्पताल में 298 शव लाए गए थे।
शवों को तीन हिस्सों में बांटकर किया था अंतिम संस्कार
इन दोनों विमानों में हिंदू, मुस्लिम व इसाई तीनों धर्मों से जुड़े लोग सवार थे। धर्म गुरुओं ने काफी विचार विमर्श के बाद जिनकी पहचान नहीं हो पाई थी उन शवों को तीन हिस्सों में बांटकर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इनमें मुस्लिम और इसाई शवों को सामूहिक तौर पर दफनाया गया था वहीं हिंदुओं के शवों का दाह संस्कार किया गया था। दादरी नगर के चिड़िया रोड पर कब्रिस्तान में आज भी इस हादसे की निशानियां बाकी हैं।
दिल्ली से सऊदी अरब के लिए रवाना हुई थी फ्लाइट मुस्लिम इंतजामिया कमेटी के प्रधान, रिटायर्ड कैप्टन मोहम्मद शरीफ ने बताया कि 29 साल पहले 12 नवंबर 1996 को सऊदी अरब एयरलाइंस की फ्लाइट शाम साढे छह बजे के बाद नई दिल्ली इंदिरा गांधी हवाई अड्डे से दहरान के लिए उड़ान भरी थी। इसमें कुल 312 यात्री और क्रू मेंबर्स थे।
दादरी में हुआ था यह हादसा
इन यात्रियों में अधिकतर भारतीय थे जो सऊदी अरब में नौकरी करने जा रहे थे। ठीक इसी समय कजाकिस्तान एयरलाइन की एक फ्लाइट नई दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरने वाली थी। इसमें कुल 37 व्यक्ति सवार थे। जिनमें अधिकतर कजाकिस्तान के व्यापारी थे जो भारत में व्यापार के सिलसिले में आ रहे थे। एक ही ऊंचाई पर दोनों विमानों के आने, कजाकिस्तान के पायलट के अंग्रेजी कम जानने की भाषा संबंधी दिक्कत के कारण दादरी में यह हादसा हुआ था। इस हादसे में दोनों विमानों में सवार सभी 349 लोग मारे जा चुके थे। जमीन पर कोई हताहत नहीं हुआ था, क्योंकि विमान गांवों की आबादी क्षेत्र में नहीं गिरा था। उस समय माना जा रहा था कि सऊदी अरब एयरलाइंस के पायलट ने विमान को आबादी क्षेत्र में ना गिरने देने के लिए पूरा संघर्ष किया था। दोनों विमानों के मलबे को हटाने, शवों को अस्पताल भिजवाने, शरीर के अंगों को इकट्ठा करने में टीमों को तीन दिन लग गए। 14 नवंबर की रात तक सिविल अस्पताल में 298 डेडबाडी लाई जा चुकी थीं। इनमें से 118 मृत लोगों की पहचान हो गई। कानूनी प्रक्रिया के बाद उनके परिजनों को बुलाकर शव सौंप दिए गए। बताया जाता है कि 51 लोगों के शरीर पूरी तरह जल चुके थे।