शिक्षक राष्ट्र निर्माण की धुरीउनके संस्कारों से ही विकसित भारत का सपना होगा साकार- मंत्री महीपाल ढांडा

 
शिक्षक राष्ट्र निर्माण की धुरी, उनके संस्कारों से ही विकसित भारत का सपना होगा साकार- मंत्री महीपाल ढांडा

 

 

शिक्षकों के समर्पण से मजबूत होगा समाजनशामुक्त और संस्कारवान पीढ़ी तैयार करने में निभाएं अग्रणी भूमिका

 

 

चंडीगढ़, 2 सितंबर- हरियाणा के शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा ने शिक्षक दिवस के अवसर पर पानीपत के थिराना स्थित ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के ज्ञान मानसरोवर रिट्रीट सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक राष्ट्र के भविष्य के निर्माता हैं। शिक्षक केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान नहीं देतेबल्कि उनके व्यक्तित्वचरित्र और संस्कारों को आकार देकर उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। गुरु वह शक्ति है जो अज्ञान के अंधकार से ज्ञान और प्रकाश की ओर ले जाती है। इसलिए शिक्षक के कंधों पर समाज और राष्ट्र की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।

 

शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज भारत दुनिया के मजबूत देशों की कतार में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प प्रत्येक नागरिक को लेना होगा। इस संकल्प को धरातल पर उतारने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हैक्योंकि वे भावी पीढ़ी का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व के सामने केवल आर्थिक प्रगति का विचार नहीं रखाबल्कि विश्व कल्याणमानवतासंस्कार और आदर्श जीवन का संदेश भी दिया है। शिक्षकों को विद्यार्थियों में इन्हीं श्रेष्ठ विचारों और मूल्यों का बीजारोपण करना चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक पूरी तरह सक्षम और शिक्षित हैं। उनकी मेहनत से शिक्षा के क्षेत्र में परीक्षा परिणामों में सकारात्मक बदलाव आया है और सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल रही है। सरकार विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने के लिए सरकारी विद्यालयों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। शिक्षकों के समर्पण और सरकार के प्रयासों से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। मंत्री ने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलतासंस्कारनैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी का भाव विद्यार्थियों में पैदा करना समय की आवश्यकता है।

 

उन्होंने महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि पेड़-पौधों में भी जीवन है। हमें प्रकृति का शोषण नहींबल्कि उसका संरक्षण करते हुए संतुलित उपयोग करना चाहिए तथा अधिक से अधिक पौधारोपण को बढ़ावा देना चाहिए। शिक्षक बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर समाज में सकारात्मक बदलाव के वाहक बन सकते हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि गुरु का आशीर्वाद और मार्गदर्शन व्यक्ति को कठिन से कठिन परिस्थितियों से निकलने की शक्ति देता है। गुरु का हाथ सिर पर हो तो बड़ी से बड़ी समस्या भी रास्ता छोड़ देती है। उन्होंने अपने निजी कोष से संस्था को 11 लाख रुपये देने की घोषणा भी की।

 

इस अवसर पर उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठसंस्था के निदेशक भारत भूषणसरला बहनजिला शिक्षा अधिकारी राकेश बूराजिला मौलिक शिक्षा अधिकारी नीलम कुंडूबीईओ जयपालविजय कुमार सहित विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक मौजूद रहे।