एक लाख के सहारे बदली जिंदगी, कपड़ों की दुकान से सुनीता ने खड़ी की आत्मनिर्भरता की नई कहानी
सरकारी योजना से मिला ऋण, मेहनत और सही इस्तेमाल से बढ़ा कारोबार
हिसार, 16 सितंबर।
किसी भी छोटे कारोबार की शुरुआत के पीछे अक्सर एक बड़ा सपना छिपा होता है। कभी पूंजी की कमी उस सपने को रोक देती है, तो कभी सही अवसर मिलने पर वही सपना परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने का जरिया बन जाता है। हिसार की नवदीप कॉलोनी निवासी सुनीता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने अपने हुनर और मेहनत को कारोबार का रूप देने का फैसला किया और सरकारी ऋण योजना का सहारा लेकर कपड़ों की दुकान शुरू की। सुनीता ने सरकार एवं संबंधित विभाग द्वारा प्रदान की गई आर्थिक सहायता के लिए आभार व्यक्त किया।
यह जानकारी देते हुए उपायुक्त महेंद्र पाल ने बताया कि सुनीता ने हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम हिसार के माध्यम से 10 नवंबर 2025 को एक लाख रुपये का ऋण लेकर अपने कपड़ों के कारोबार की शुरुआत की। उसका उद्देश्य था परिवार के लिए आय का स्थायी साधन तैयार करना और स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत बनना।
उन्होंने कहा कि शुरुआत भले ही छोटी थी, लेकिन सुनीता के सामने लक्ष्य बड़ा था। कपड़ों की दुकान के लिए मिली ऋण राशि का उपयोग उन्होंने अपने रोजगार को खड़ा करने में किया। दुकान शुरू होने के बाद धीरे-धीरे ग्राहकों से जुड़ाव बढ़ा और कारोबार आगे बढ़ने लगा। कपड़ों का कारोबार ऐसा क्षेत्र है, जिसमें ग्राहकों की पसंद, मौसम और जरूरत के अनुसार सामान उपलब्ध कराना जरूरी होता है। सुनीता ने इसी कारोबार को अपनी आमदनी का जरिया बनाया। सरकारी योजना के तहत मिला ऋण उनके लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं रहा, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर बन गया।
सबसे अहम बात यह रही कि उन्होंने ऋण को केवल खर्च करने के बजाय उसे रोजगार के साधन में लगाया। कारोबार से होने वाली आमदनी ने उन्हें ऋण की किस्तें चुकाने में भी मदद की। उपायुक्त ने बताया कि अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती रोजगार के लिए शुरुआती पूंजी जुटाने की होती है। ऐसे में सरकारी योजनाओं के माध्यम से मिलने वाली वित्तीय सहायता स्वरोजगार शुरू करने में मददगार हो सकती है। सुनीता की कहानी इसी बात को सामने रखती है।
उन्होंने उपलब्ध आर्थिक सहायता का इस्तेमाल कपड़ों की दुकान शुरू करने में किया और अपने रोजगार को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। उनकी मेहनत, लगन और योजना के सही इस्तेमाल से कारोबार में वृद्धि हुई और आय बढ़ी। सुनीता की सफलता की कहानी केवल एक दुकान शुरू करने तक सीमित नहीं है। उन्होंने बताया कि यदि जरूरतमंद परिवारों को रोजगार शुरू करने के लिए पूंजी और उचित अवसर मिले, तो वे अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। ऋण का सही उपयोग और ईमानदारी से मेहनत आर्थिक आत्मनिर्भरता का रास्ता खोल सकती है। सुनीता के लिए कपड़ों की यह दुकान अब केवल रोजमर्रा की आमदनी का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की पहचान बन चुकी है।
