Punjab and Haryana High Court: हरियाणा सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, खाटू श्याम बाबा मंदिर प्रबंधन पर विवाद गहराया
Haryana And Punjab Highcourt: हरियाणा मंत्रिमंडल द्वारा श्री खाटू श्याम बाबा मंदिर, चुलकाना (पानीपत) के प्रबंधन के लिए श्री खाटू श्याम बाबा श्राइन बोर्ड बनाने के फैसले पर विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला अब पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर अंतिम निर्णय लेने से रोक लगा दी है।
मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया था बोर्ड गठन का फैसला
23 जनवरी को चंडीगढ़ में हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया था कि चुलकाना स्थित श्री खाटू श्याम बाबा मंदिर के बेहतर प्रबंधन और तीर्थयात्रियों को अधिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए श्राइन बोर्ड का गठन किया जाएगा।
सरकार का तर्क है कि बोर्ड के माध्यम से मंदिर की परिसंपत्तियों का उचित प्रबंधन होगा और तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी।
मंदिर समिति ने उठाए सवाल, याचिका दायर की
श्री श्याम मंदिर सेवा समिति, चुलकाना धाम, जो 1982 से मंदिर के प्रबंधन का कार्य देख रही है, ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में समिति ने सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए कहा है कि:
- 1982 से मंदिर का प्रबंधन समिति द्वारा किया जा रहा है।
- समिति हरियाणा सोसायटी पंजीकरण एवं विनियमन अधिनियम 2012 के तहत पंजीकृत है।
- सभी आवश्यक दस्तावेज और जानकारी संबंधित प्राधिकरणों को पहले ही सौंप दी गई है।
समिति का आरोप है कि सरकार अवैध रूप से मंदिर बोर्ड का गठन कर मंदिर के प्रबंधन और प्रशासन को अपने हाथ में लेना चाहती है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि:
- अधिकारियों द्वारा अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाए।
- सरकार से इस मामले में पूरी जानकारी और हलफनामा मांगा गया है।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि मंदिर तक जाने वाली सड़क की री-कारपेटिंग पूरी होनी चाहिए। अगली सुनवाई के दौरान (19 मई), जिम्मेदार अधिकारी को यह स्पष्ट करना होगा कि सड़क का कार्य पूरा हुआ है या नहीं।
सरकार की योजना और तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं
कैबिनेट ने मंदिर प्रबंधन के लिए श्राइन बोर्ड बनाने का प्रस्ताव पारित किया। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य:
- तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना।
- मंदिर की परिसंपत्तियों का पारदर्शी और कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करना।
- तीर्थ स्थल का विकास और संरचना को आधुनिक रूप देना।
अगली सुनवाई 19 मई को
इस मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी। अदालत ने सरकार से इस विवाद पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। साथ ही मंदिर तक जाने वाली सड़क की मरम्मत और अन्य सुविधाओं पर भी रिपोर्ट मांगी गई है।
