1339 करोड़ रुपये के निवेश के साथ यहां हुई औद्योगिक कॉरिडोर की शुरुआत, 2029 तक 1 लाख नौकरियां देने का लक्ष्य 

 
1339 करोड़ रुपये के निवेश के साथ यहां हुई औद्योगिक कॉरिडोर की शुरुआत, 2029 तक 1 लाख नौकरियां देने का लक्ष्य 

 Gaya Industrial Corridor Gets Underway With Rs 1,339: गया जिले के डोभी में 'इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर' (IMC) के लिए निर्माण और साइट विकास का काम 'अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर' के तहत चल रहा है। 1,339.02 करोड़ रुपये की इस परियोजना से औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने पर लगभग एक लाख रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। लगभग 1,670.22 एकड़ में फैली यह परियोजना दक्षिणी बिहार में एक बड़ा औद्योगिक केंद्र बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इसका निर्माण अप्रैल 2026 में शुरू हुआ और इसे अप्रैल 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस विकास कार्य से विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और सेवा क्षेत्र के व्यवसायों के आकर्षित होने की उम्मीद है, जिन्हें सड़क संपर्क, बिजली के बुनियादी ढांचे, जलापूर्ति, अपशिष्ट जल उपचार और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का समर्थन मिलेगा।

औद्योगिक विकास के लिए 1,670 एकड़ जमीन चिह्नित

यह औद्योगिक क्लस्टर डोभी ब्लॉक के 13 राजस्व गांवों में फैला है, जिनमें मंगरुचक, बरिया, गंजीचक, खरंती, सुगासोत और मंझौली शामिल हैं। साइट पर जमीन को समतल करने का काम शुरू हो गया है, और निर्माण से जुड़ी सुविधाएं, जैसे मिक्सर प्लांट और गेस्ट हाउस तैयार किए जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यहां एक हेलीपैड भी बनाया गया है। यह परियोजना 'नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम' के तहत 'अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर' (AKIC) का हिस्सा है। इस पहल का उद्देश्य ऐसा औद्योगिक बुनियादी ढांचा तैयार करना है, जो निवेश को आकर्षित कर सके और विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा दे सके।

विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग की योजना

प्रस्तावित औद्योगिक केंद्र में खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग), इंजीनियरिंग, तकनीकी उपकरण निर्माण, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों के व्यवसायों के लिए जगह होगी। प्रस्तावित भूमि-उपयोग योजना के अनुसार, परियोजना क्षेत्र का लगभग 55% हिस्सा औद्योगिक इकाइयों के लिए आवंटित किया जाएगा, जबकि 18% हिस्सा सड़कों और पार्किंग के लिए रखा गया है। लगभग 20.30% हिस्से को 'ग्रीन स्पेस' (हरित क्षेत्र) के रूप में विकसित करने की योजना है, और बाकी बचा हिस्सा अन्य सुविधाओं और बुनियादी जरूरतों के लिए होगा। इस विकास योजना में एक कौशल विकास केंद्र, स्वास्थ्य सुविधाएं, एक होटल और सामुदायिक सुविधाएं भी शामिल हैं, ताकि इस औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों और व्यवसायों को जरूरी मदद मिल सके। सड़क संपर्क और बिजली अवसंरचना

यह परियोजना स्थल प्रमुख सड़क मार्गों के निकट स्थित है, जिनमें NH-19 (जिसे ग्रांड ट्रंक रोड के नाम से भी जाना जाता है) और NH-22 शामिल हैं। औद्योगिक इकाइयों तक पहुँच बेहतर बनाने और माल की आवाजाही को सुगम करने के लिए नई संपर्क सड़कें बनाने की योजना है। कच्चे माल और तैयार उत्पादों के परिवहन में सहायता के लिए एक रेलवे साइडिंग और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं की भी परिकल्पना की गई है। इस प्रस्तावित कनेक्टिविटी से व्यवसायों को बिहार और अन्य औद्योगिक व वाणिज्यिक केंद्रों के बीच माल लाने-ले जाने में मदद मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना के लिए बिजली अवसंरचना को 162 MVA ट्रांसमिशन सिस्टम के आधार पर तैयार किया जा रहा है। इसमें बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी और साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी बिजली से जुड़ी व्यवस्थाओं में शामिल हैं।

अपशिष्ट जल उपचार और पर्यावरणीय अवसंरचना

इस औद्योगिक क्लस्टर की अवसंरचना योजना में जलापूर्ति, अपशिष्ट जल उपचार (वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट) और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) प्रणालियाँ शामिल हैं। अनुमान है कि इस परियोजना के लिए प्रतिदिन 37.41 मिलियन लीटर पानी (MLD) की आवश्यकता होगी। इसमें से 14.02 MLD पानी औद्योगिक उपयोग के लिए और 6.36 MLD घरेलू खपत के लिए होगा। औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार के लिए दो 'कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट' (CETP) लगाने की योजना है, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 14.50 MLD होगी। इसके अलावा, प्रतिदिन 34 टन क्षमता वाली एक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली भी प्रस्तावित है, साथ ही उपचारित पानी (ट्रीटेड वॉटर) के पुन: उपयोग की योजना भी शामिल है। इन सुविधाओं का उद्देश्य औद्योगिक इकाइयों के संचालन में मदद करना और परियोजना क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट जल व कचरे का उचित प्रबंधन करना है।

उद्योगों के विकास से एक लाख नौकरियों की उम्मीद

इस परियोजना से लगभग एक लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। नौकरियों की वास्तविक संख्या इस बात पर निर्भर करेगी कि यहां कौन-से उद्योग स्थापित होते हैं और वे कितना निवेश लाते हैं। जैसे-जैसे वाणिज्यिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी, इस औद्योगिक कॉरिडोर में परिवहन, वेयरहाउसिंग, रखरखाव, हॉस्पिटैलिटी और अन्य सहायक सेवाओं की माँग भी बढ़ेगी। अपनी प्रस्तावित विनिर्माण सुविधाओं और परिवहन संपर्कों के माध्यम से, डोभी परियोजना का लक्ष्य गया के औद्योगिक आधार को मजबूत करना और इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना है। रोजगार पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव, अवसंरचना विकास की गति और यहां स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाइयों की संख्या पर निर्भर करेगा।