पिछले एक दशक में भारत केवल प्रौद्योगिकी के उपयोगकर्ता से आगे बढ़कर उसका निर्माण करने वाला देश बन गया है। डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे ने पहले ही दुनिया को दिखाया है कि भारत किस तरह जनसंख्या के बड़े स्तर पर डिजिटल प्रणालियों का निर्माण कर सकता है। यही आत्मविश्वास अब डिजिटल दुनिया से निकलकर भौतिक दुनिया में भी फैल रहा है—इस बात तक कि भारत किस तरह चीजों की रूपरेखा तैयार करता है, उनका निर्माण करता है और उनका विनिर्माण करता है। यहीं एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (एएम) की भूमिका सामने आती है। यह एक उभरती हुई प्रौद्योगिकी और नवाचार है, जो डिजिटल डिजाइनों को वास्तविक, भौतिक वस्तुओं में बदल रहा है।
एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग भारत की विनिर्माण यात्रा के नवीनतम इंजीनियरिंग क्षेत्रों में से एक बन रही है। वैश्विक एएम मशीनों का बाजार 2035 तक 149 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि एएम-इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला 18 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 112 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। इससे भारत के लिए पॉलिमर, धातु, कंपोजिट, सिरेमिक और सेमीकंडक्टर-ग्रेड सामग्री के क्षेत्र में एएम प्लेटफॉर्म के प्रतिस्पर्धी निर्माता के रूप में उभरने का वास्तविक अवसर मिलता है।
