Haryana State Song Controversy: विधानसभा में पेश होने से पहले विवादों में घिरा हरियाणा का राज्य गीत

 
चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा में हरियाणा का राज्य गीत (State Song of Haryana) को पेश करने से पहले ही विवाद खड़ा हो गया है। सोनीपत और फतेहाबाद के दो लेखक-कलाकारों ने इस गीत पर अपना दावा ठोका है। विधानसभा कमेटी ने कुरुक्षेत्र के डॉ. श्याम सखा द्वारा गाए गए गीत को चयनित कर लिया है। हालांकि, इसे बजट सत्र में विधायकों के सामने सुनाया जाना बाकी है। सोमवार से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में यह मुद्दा गर्मा सकता है, जिससे सरकार किसी भी विवाद से बचने की कोशिश कर रही है।

कमेटी गठन और चयन प्रक्रिया

हरियाणा विधानसभा ने राज्य गीत को फाइनल करने के लिए रेवाड़ी से भाजपा विधायक लक्ष्मण यादव की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की थी। इस कमेटी में निम्नलिखित सदस्य शामिल थे:
सदस्य का नाम पार्टी/पद
लक्ष्मण यादव भाजपा विधायक, रेवाड़ी
गीता भुक्कल कांग्रेस विधायक, झज्जर
विनोद भयाना भाजपा विधायक, हांसी
बलवान सिंह दौलतपुरिया कांग्रेस विधायक, फतेहाबाद
आदित्य देवीलाल इनेलो विधायक, डबवाली
कमेटी को कुल 204 गीतों के प्रस्ताव मिले थे, जिनमें से 3 गीतों का चयन किया गया। अंतिम मंथन के बाद ‘जय जय जय हरियाणा’ को राज्य गीत के रूप में फाइनल किया गया।

राज्य गीत का निर्माण

हरियाणा के राज्य गीत ‘जय जय जय हरियाणा’ को पानीपत के डॉ. बालकिशन शर्मा ने लिखा है। इस गीत में 21 पंक्तियां हैं, जिनमें कुरुक्षेत्र की धरती, किसानों, खिलाड़ियों, सैनिकों और हरियाणा की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाया गया है।
राज्य गीत से जुड़ी प्रमुख जानकारियां
गीतकार – डॉ. बालकिशन शर्मा
गायक – डॉ. श्याम शर्मा
संगीतकार – पारस चोपड़ा
निर्देशक – मालविका पंडित
इस गीत को पहले बॉलीवुड गायक कैलाश खेर की आवाज में रिकॉर्ड किया जाना था, लेकिन हरियाणवी टच की कमी के कारण डॉ. श्याम शर्मा ने इसे गाया। विधानसभा की कमेटी ने इस गीत पर अपनी अंतिम रिपोर्ट पिछले सप्ताह प्रस्तुत की थी।

सोनीपत की लेखिका गीतू परी का दावा

विधानसभा में पेश होने से पहले ही सोनीपत की लेखिका और अभिनेत्री गीतू परी ने गीत के बोलों पर अपना दावा ठोका है। उन्होंने कहा कि, “राज्य गीत के लिरिक्स मेरे गीत से काफी मिलते-जुलते हैं। मैंने यह गीत 29 जनवरी 2024 को लिखा था। राज्य गीत का शीर्षक भी मेरे गीत से मेल खाता है।” गीतू परी ने यह भी कहा कि उनके गीत में ‘जय-जय’ शब्द दो बार आया था, जिसे राज्य गीत में तीन बार कर दिया गया। उन्होंने सरकार से मांग की है कि यदि उनके गीत के बोलों का इस्तेमाल किया गया है, तो उन्हें उचित श्रेय मिलना चाहिए।

फतेहाबाद के कृष्ण कुमार का भी दावा

फतेहाबाद के गांव ढिंगसरा निवासी कृष्ण कुमार ने भी गीत के बोलों पर अपना दावा ठोका है। उन्होंने बताया कि 2021 में उन्होंने राज्य गीत के लिए आवेदन किया था और अपना गीत सरकार को भेजा था। 2023 में उन्हें जानकारी मिली कि उनके गीत को शॉर्टलिस्ट किया गया है, लेकिन अब किसी और को इसका श्रेय दिया जा रहा है। कृष्ण कुमार के अनुसार, 26 जनवरी 2024 को गणतंत्र दिवस पर हरियाणा की झांकी में उनके गीत की धुन बजाई गई थी। लेकिन अब उन्हें इस गीत का रचनाकार नहीं बताया जा रहा है। उन्होंने इस संबंध में RTI दायर की थी, जिसका कोई जवाब नहीं मिला।

क्या विधानसभा में उठेगा मुद्दा?

हरियाणा विधानसभा की कमेटी के पास अब इस गीत पर उठे विवाद को हल करने की चुनौती है। यह मुद्दा बजट सत्र में उठ सकता है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस विवाद को सुलझाने के लिए कोई नया कदम उठाती है या पहले से तय किए गए राज्य गीत को ही मंजूरी दी जाती है।