हरियाणा में राजस्व संबंधी समय-सीमा तय की, दाखिल-खारिज मामलों के निपटारे के लिए पटवारियों को 5 दिन, कानूनगो को 3 दिन का समय
चंडीगढ़, 2 सितंबर - हरियाणा सरकार ने राजस्व अधिकारियों द्वारा दाखिल-खारिज (इंतकाल/म्यूटेशन) के मामलों को निपटाने की सख्त समय-सीमा तय की है। लंबित मामलों में कमी लाने और दाखिल-खारिज प्रक्रिया में अधिक जवाबदेही लाने के उद्देश्य से अब पटवारियों को 5 दिनों के भीतर और कानूनगो व वृत्त राजस्व अधिकारियों (CROs) को 3-3 दिनों के भीतर मामलों को स्पष्ट (क्लियर) करना अनिवार्य होगा।
यह निर्णय वित्त आयुक्त (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग) डॉ. सुमिता मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में लिया गया। यह बैठक ऑटो-म्यूटेशन सिस्टम, म्यूटेशन और जमाबंदी के प्रारूप (फॉर्मेट), डिजिटल क्रॉप सर्वे और नागरिक संचार सेवाओं की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी।
बैठक में निर्णय लिया गया कि निर्धारित समय-सीमा को मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में शामिल किया जाएगा, जिससे पूरे राज्य में दाखिल-खारिज का निपटारा समयबद्ध हो सकेगा। ऑटो-म्यूटेशन के कार्यान्वयन, लंबित मामलों, तकनीकी समस्याओं के समाधान और ग्राउंड लेवल पर आने वाली दिक्कतों की नियमित निगरानी के लिए एक समर्पित 'मॉनिटरिंग सेल' भी गठित किया जाएगा।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि अथक प्रयासों के चलते 5 लाख से अधिक म्यूटेशन मामलों का सफलतापूर्वक समाधान किया जा चुका है, जिससे राज्य भर में लंबित म्यूटेशन मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है। Web-HALRIS से माइग्रेशन के लिए अभी भी लंबित लगभग 40,000 पुराने (विरासत) म्यूटेशन मामलों पर चर्चा करते हुए, डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए कि ऑटो-म्यूटेशन सिस्टम का टेस्ट चेक 2 दिनों के भीतर पूरा किया जाए। संतोषजनक सत्यापन के अधीन, सभी लंबित पुराने मामलों को 10 दिनों के भीतर नए सिस्टम में माइग्रेट किया जाए तथा लंबित रिकॉर्ड और डेटा की प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा कर उन्हें क्लियर किया जाए।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा 23 जून, 2026 को उद्घाटन किए गए ऑटो-म्यूटेशन सिस्टम ने संपत्ति पंजीकरण को सीधे म्यूटेशन सेवाओं से जोड़कर इस प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। इस प्रणाली के तहत, संपत्ति का पंजीकरण होते ही म्यूटेशन स्वचालित (ऑटोमैटिक) रूप से शुरू हो जाता है, जिससे अलग से आवेदन करने की आवश्यकता समाप्त हो गई है और तहसील कार्यालयों के बार-बार चक्कर काटने से मुक्ति मिली है। नागरिक अपने म्यूटेशन की स्थिति ऑनलाइन 'रियल-टाइम' में ट्रैक कर सकते हैं और कहीं भी, कभी भी म्यूटेशन रिकॉर्ड एक्सेस, डाउनलोड और प्रिंट कर सकते हैं। तकनीक-आधारित, कागज-रहित यह प्रणाली भूमि रिकॉर्ड के समय पर अद्यतनीकरण (अपडेशन) को सुनिश्चित कर रही है, साथ ही राजस्व प्रशासन में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाते हुए किसानों, भूस्वामियों और अन्य हितधारकों को सेवाओं तथा लाभों का तेजी से वितरण संभव बना रही है।
विभाग नागरिकों और ग्राउंड लेवल के अमले के लिए म्यूटेशन दस्तावेजों को भी सरल बना रहा है। संशोधित म्यूटेशन प्रिंट प्रारूप हिंदी में जनरेट किया जाएगा, जिसमें सभी कॉलम के शीर्षक सरल भाषा में दिखाई देंगे, कॉलम 7 में नया खेवट नंबर जोड़ा जाएगा और जहां लागू हो वहां लेनदेन की राशि (कंसीडरेशन अमाउंट) दर्ज की जाएगी।
नागरिक केंद्रित पहल के तहत, आवेदकों को अब म्यूटेशन प्रक्रिया के हर चरण पर व्हाट्सएप नोटिफिकेशन मिलेंगे, जबकि विभाग के चैटबॉट "भूमित्रा" का नाम बदलकर "HRY-भूमित्रा" किया जा रहा है।
जमाबंदी के प्रारूप में भी बदलाव किया जा रहा है ताकि इसमें 'हदबस्त' नंबर, ULPIN, भूमि सर्वेक्षण संख्या और भूस्वामी का पता शामिल किया जा सके। इसके अलावा, डॉ. मिश्रा ने हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (HARSAC) को 7 सितंबर तक डिजिटल क्रॉप सर्वे का डेटा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं ताकि 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' (MFMB) डेटा के साथ इसकी विसंगतियों का विश्लेषण किया जा सके।
