AI City and business park to be built in Noida : नोएडा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिटी-सह-बिजनेस पार्क विकसित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नोएडा अथॉरिटी ने अपनी 224वीं बोर्ड बैठक में इस परियोजना के लिए 'मास्टर डेवलपर' चुनने की प्रक्रिया शुरू करने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। बैठक में IT सेक्टर, कमर्शियल प्रोजेक्ट्स, सौर ऊर्जा, किसानों को जमीन आवंटन और भवन नियमों से जुड़े कई अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
AI सिटी और बिजनेस पार्क के लिए मास्टर डेवलपर का चयन
नोएडा में AI सिटी-सह-बिजनेस पार्क विकसित करने के लिए 'उत्तर प्रदेश प्राइवेट बिजनेस पार्क डेवलपमेंट स्कीम-2025' को अपनाने और मास्टर डेवलपर के चयन के लिए 'रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल' (RFP) जारी करने को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), IT/ITeS, रिसर्च, स्टार्टअप्स और कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) से जुड़ी सुविधाएं होंगी।
मास्टर डेवलपर का चयन एक प्रतिस्पर्धी ई-नीलामी (e-auction) के जरिए किया जाएगा। यह परियोजना 'डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट और ट्रांसफर' (DBFOT) मॉडल के तहत विकसित की जाएगी, जबकि जमीन का मालिकाना हक नोएडा अथॉरिटी के पास ही रहेगा। तय शर्तों के अनुसार, 45 साल की लीज को आगे और 45 साल के लिए बढ़ाने का विकल्प होगा। कुल निर्मित क्षेत्र (built-up area) का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा IT और ज्ञान-आधारित सेवाओं (knowledge-based services) के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
सेक्टर-147 में IT/ITeS भूमि आवंटन योजना को मंजूरी
बुधवार को हुई एक बैठक में—जिसकी अध्यक्षता इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कमिश्नर और नोएडा अथॉरिटी के चेयरमैन दीपक कुमार ने की—सेक्टर-147 में 68,000 वर्ग मीटर जमीन पर संस्थागत IT/ITeS भूमि आवंटन योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई।
इस योजना का उद्देश्य एक विश्व स्तरीय 'ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर' (GCC) हब और ग्रेड-A ऑफिस स्पेस तैयार करना है। इस पहल के तहत, IT और ITeS सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों को जमीन आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सेक्टर-105 में इंटीग्रेटेड ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स विकसित किया जाएगा
नोएडा के सेक्टर-105 में 12,596.64 वर्ग मीटर की कमर्शियल ज़मीन पर एक 'इंटीग्रेटेड ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स' विकसित करने की योजना है। पूरी ज़मीन एक ही व्यक्ति या संस्था को, एक सिंगल-बिड प्रक्रिया के ज़रिए, एक ही प्लॉट के रूप में आवंटित की जाएगी।
इस प्रोजेक्ट के लिए 4 का FAR (फ्लोर एरिया रेशियो) और अधिकतम 20 मीटर की ऊँचाई की अनुमति होगी। तय नियमों के अनुसार, प्लॉट के अंदर ही पार्किंग की सुविधा देना अनिवार्य होगा। निर्माण कार्य को अधिकतम तीन चरणों में पूरा करना होगा, और लीज़ डीड (पट्टा विलेख) पर हस्ताक्षर होने के पाँच वर्षों के भीतर 'ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट' (कब्ज़ा प्रमाण पत्र) प्राप्त करना ज़रूरी होगा।
STP और पार्किंग स्थलों पर सोलर पावर प्लांट लगाए जाएंगे
नोएडा अथॉरिटी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), मल्टी-लेवल कार पार्किंग सुविधाओं और भूमिगत 'गंगाजल' (गंगा का पानी) जलाशयों पर लगभग 15 मेगावाट (MW) कुल क्षमता वाले सोलर पावर प्लांट लगाए जाएंगे। इस परियोजना को RESCO (रिन्यूएबल एनर्जी सर्विस कंपनी) मॉडल के तहत लागू करने की मंजूरी दी गई है।
इस पहल के तहत, STP और जलाशयों पर लगभग 8 MW क्षमता वाले सोलर पावर प्लांट लगाए जाएंगे, जबकि मल्टी-लेवल पार्किंग स्थलों पर लगभग 7 MW क्षमता वाले प्लांट लगाए जाएंगे। यह परियोजना एक नामित एजेंसी के साथ 'पावर परचेज एग्रीमेंट' (PPA) के आधार पर पूरी की जाएगी।
इससे अथॉरिटी के बिजली खर्च में कमी आने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अथॉरिटी के अनुमान के अनुसार, इस परियोजना से अगले 25 वर्षों में कार्बन उत्सर्जन में लगभग 500,000 टन की कमी आ सकती है।
किसानों के 5% 'आबादी' (आवासीय) प्लॉट के लिए आसान प्लानिंग प्रक्रिया
नोएडा मास्टर प्लान-2031 के ज़ोनिंग नियमों में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है। इससे किसानों को आवंटित 5% 'आबादी' (आवासीय) प्लॉट से जुड़े मुद्दों का तेजी से समाधान होने की उम्मीद है।
नोएडा अथॉरिटी की नीति के अनुसार, किसान अपनी अधिग्रहित भूमि के बदले विकसित आवासीय प्लॉट पाने के हकदार हैं। हालांकि इनमें से अधिकांश प्लॉट के लिए प्लानिंग प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन कुछ मामलों में यह अभी भी लंबित है। चूंकि शहर का विकास लगभग पूरा हो चुका है, इसलिए इन विशिष्ट प्लॉट की प्लानिंग में चुनौतियां आ रही हैं। अब, मौजूदा ग्रामीण बस्तियों से सटी भूमि पर 5% 'आबादी' प्लॉट की प्लानिंग को ज़ोनिंग नियमों में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने से पहले, आम जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे। इसके बाद, इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा जाएगा।
औद्योगिक इकाइयों के लिए ट्रांसफर फीस में कमी
बोर्ड बैठक के दौरान, 'यूनिफाइड रेगुलेशंस-2025' (Unified Regulations-2025) में संशोधन के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। इन बदलावों के तहत, चालू औद्योगिक इकाइयों के लिए ट्रांसफर फीस को 10 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है। नियमों के अनुसार, तीन या पांच साल की शुरुआती अवधि पूरी होने के बाद, इकाइयों को अधिकतम तीन साल तक के लिए हर साल समय-विस्तार (time extension) दिया जा सकता है। इन अतिरिक्त वर्षों—पहले, दूसरे और तीसरे वर्ष—के लिए फीस क्रमशः 3%, 5% और 7% तय की गई है।
शेयरहोल्डिंग में बदलाव की सूचना देने में देरी होने पर लगने वाले जुर्माने को ₹500 प्रतिदिन से घटाकर ₹300 प्रतिदिन कर दिया जाएगा। इसके अलावा, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को LLP में बदलने की प्रक्रिया को सरल बना दिया गया है। साथ ही, परिवार के सदस्यों के बीच शेयरहोल्डिंग में बदलाव के मामलों में—कुछ खास शर्तों के साथ—फीस माफ करने के प्रावधानों को भी मंजूरी दी गई है।
सेक्टर-32 में कमर्शियल प्लॉट के लिए ग्राउंड रेंट में कमी
नोएडा के सेक्टर-32 में कमर्शियल प्लॉट CC-1 पर स्थित इकाइयों के उप-पट्टेदारों (sub-lessees) के लिए लागू ग्राउंड रेंट दरों को तर्कसंगत बनाने का निर्णय लिया गया है। पुनर्गणना के बाद, ग्राउंड रेंट—जो पहले ₹612 प्रति वर्ग मीटर सालाना था—अब लगभग ₹232 प्रति वर्ग मीटर सालाना होगा।
इसके अलावा, हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF), सोसायटियों और ट्रस्टों के पक्ष में उप-पट्टा विलेख (sub-lease deeds) निष्पादित करने और कमर्शियल संपत्तियों के हस्तांतरण की सुविधा के लिए मंजूरी दे दी गई है। साथ ही, संपत्तियों को कई पक्षों (parties) के नाम पर रखने की अनुमति देने का प्रावधान भी किया गया है।
मोबाइल टावर और दूरसंचार परमिट के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया
केंद्र सरकार की 17 सितंबर, 2024 की अधिसूचना के अनुसार, एक नई दूरसंचार नीति अपनाई गई है। अब मोबाइल टावर और 'राइट ऑफ वे' (RoW) से संबंधित परमिट प्राप्त करने की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी।
इस नई प्रणाली के तहत, पहले की शर्तें—जैसे ₹1 लाख का आवेदन शुल्क (मौजूदा टावरों के लिए ₹1.5 लाख) और ₹3 लाख की बैंक गारंटी—को समाप्त कर दिया गया है। हालांकि, जमीन के ऊपर दूरसंचार नेटवर्क लगाने से संबंधित आवेदनों की जांच के लिए ₹10,000 का शुल्क लिया जाना जारी रहेगा।
सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान की अंतिम रिपोर्ट को मंजूरी
बोर्ड ने नोएडा के लिए तैयार की गई 'सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान' की अंतिम रिपोर्ट को मंजूरी दे दी है और इसे सरकार को सौंपने का निर्णय लिया है। यह योजना औद्योगिक और कमर्शियल गतिविधियों, माल परिवहन (freight transport), यातायात प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे का व्यापक विश्लेषण प्रदान करती है।
इसके उद्देश्यों में माल परिवहन और वितरण प्रणालियों में सुधार करना, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना, यातायात की भीड़ और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना, तथा संबंधित विभागों और परिवहन ऑपरेटरों के बीच समन्वय को मजबूत करना शामिल है।
'मॉडल बिल्डिंग रेगुलेशंस-2026' को लागू करने की मंजूरी
नोएडा में उत्तर प्रदेश सरकार के 'मॉडल बिल्डिंग रेगुलेशंस-2026' (Model Building Regulations-2026) को लागू करने की मंजूरी दे दी गई है। इन नए नियमों के लागू होने की निगरानी करने और अथॉरिटी बोर्ड स्तर पर निर्णय लेने की आवश्यकता वाले मामलों को सुलझाने के लिए, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी के अधिकारियों की एक संयुक्त समिति बनाई जाएगी।
बैठक में मौजूद अधिकारी
बुधवार को आयोजित 224वीं बोर्ड बैठक में नोएडा अथॉरिटी के CEO कृष्ण करुणेश, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के CEO एन.जी. रवि कुमार और यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के CEO राकेश कुमार सिंह के साथ-साथ बोर्ड के अन्य सदस्य भी शामिल हुए।
