आज से लागू होंगे 6 बड़े बदलाव, आपकी जेब और जीवन पर सीधा असर, पढ़ें फटाफट

 
आज से लागू होंगे 6 बड़े बदलाव, आपकी जेब और जीवन पर सीधा असर, पढ़ें फटाफट

1 फरवरी 2025 को पेश किए गए नए वित्त वर्ष के बजट के तहत कई अहम बदलाव 1 अप्रैल 2025 से लागू होने जा रहे हैं। इनमें से कुछ जैसे आयकर छूट और सब्सिडी तत्काल प्रभावी होंगे, जबकि अन्य योजनाओं का लाभ प्रक्रिया पूरी होने के बाद मिलेगा। आइए जानते हैं उन 6 बड़े बदलावों के बारे में, जो आप पर सीधा असर डालेंगे।

1. टैक्स स्लैब में बदलाव: 12 लाख तक की आय टैक्स-फ्री

  • नई टैक्स रिजीम:
    • 0 से 4 लाख रुपये: 0% टैक्स
    • 4 से 8 लाख रुपये: 5% टैक्स (धारा 87A के तहत माफ)
    • 8 से 12 लाख रुपये: 10% टैक्स (धारा 87A के तहत माफ)
    • 12 से 16 लाख रुपये: 15% टैक्स
    • 16 से 20 लाख रुपये: 20% टैक्स
    • 20 से 24 लाख रुपये: 25% टैक्स (नया स्लैब)
    • 24 लाख रुपये से ऊपर: 30% टैक्स
  • खास बात: 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। नौकरीपेशा लोगों के लिए 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन जोड़ने पर यह सीमा 12.75 लाख रुपये तक टैक्स-फ्री होगी।
  • प्रभाव: मिडिल और अपर-मिडिल क्लास को टैक्स में राहत मिलेगी।

2. TDS लिमिट में बढ़ोतरी

  • किराये से आय: टीडीएस की सीमा 2.5 लाख से बढ़कर 6 लाख रुपये हो गई है।
  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए FD ब्याज: बैंक एफडी से ब्याज आय पर टीडीएस की सीमा 50,000 से बढ़कर 1 लाख रुपये।
  • प्रोफेशनल सर्विसेज: टीडीएस की सीमा 30,000 से बढ़कर 50,000 रुपये।
  • प्रभाव: छोटे मकान मालिकों, वरिष्ठ नागरिकों और प्रोफेशनल्स को कैश फ्लो में सुधार होगा।

3. TCS लिमिट में बढ़ोतरी

  • विदेश में पढ़ाई के लिए पैसा भेजना: टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) की सीमा 7 लाख से बढ़कर 10 लाख रुपये।
  • लोन पर छूट: बैंक या वित्तीय संस्थानों से लिया गया एजुकेशन लोन TCS से मुक्त।
  • प्रभाव: विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों के अभिभावकों को राहत, खासकर लोन लेने वालों को।

4. अपडेटेड टैक्स रिटर्न के लिए ज्यादा समय

  • नया नियम: अब टैक्सपेयर असेसमेंट ईयर के अंत से 48 महीने तक अपडेटेड रिटर्न दाखिल कर सकेंगे (पहले 24 महीने थी सीमा)।
  • प्रभाव: गलतियां सुधारने का अधिक समय मिलेगा, जिससे टैक्सपेयर्स को लचीलापन और सहूलियत होगी।

5. यूलिप पर कैपिटल गेन टैक्स

  • नया नियम: यदि यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) का सालाना प्रीमियम 2.5 लाख रुपये से अधिक है, तो इसे कैपिटल एसेट माना जाएगा।
    • 12 महीने से अधिक रखने पर: 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स।
    • 12 महीने से कम रखने पर: 20% शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स।
  • प्रभाव: हाई-प्रोफाइल यूलिप निवेशकों को टैक्स देना होगा, जिससे टैक्स-फ्री इन्वेस्टमेंट का चलन कम होगा।

6. कस्टम ड्यूटी में बदलाव: 150-200 प्रोडक्ट्स पर असर

  • सस्ते होने वाले प्रोडक्ट्स: आयातित कारें, मोटरसाइकिल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी पार्ट्स।
  • महंगे होने वाले प्रोडक्ट्स: स्मार्ट मीटर, आयातित जूते, मोमबत्तियां, नौकाएं, PVC फ्लेक्स फिल्म्स/शीट्स/बैनर, निटिंग प्रोसेस से बना कपड़ा, LCD/LED टीवी।
  • प्रभाव: कुछ वस्तुएं सस्ती होंगी, तो कुछ की कीमतें बढ़ेंगी, जो उपभोक्ताओं की खरीदारी पर असर डालेगा।

क्यों अहम हैं ये बदलाव?

ये बदलाव आपकी जेब, टैक्स प्लानिंग और रोजमर्रा की खरीदारी पर सीधा असर डालेंगे। टैक्स स्लैब और डिडक्शन में राहत से मध्यम वर्ग को फायदा होगा, वहीं कस्टम ड्यूटी से आयातित सामानों की कीमतें प्रभावित होंगी। नई TCS और TDS सीमाएं वित्तीय लेनदेन को आसान बनाएंगी।