घर देवकी-वसुदेव के, कृष्ण लिए अवतार

 
घर देवकी-वसुदेव के, कृष्ण लिए अवतार

 

घर देवकी-वसुदेव के, कृष्ण लिए अवतार।

मात यशोदा ने किया, पालन-पोषण प्यार॥

तारे सबकी आँख के, गोकुल के हैं लाल।

माखन-मिश्री संग रचे, नटखट नए कमाल॥

आततायी कंस का, अंत किया तत्काल।

ब्रज में छाया हर्ष फिर, गूँजे जय-जयकार॥

चमत्कार कर नित नए, खत्म करे सब क्लेश।

प्रेम, धर्म और सत्य का, देते शुभ संदेश॥

राधा अद्भुत प्रीत की, देती एक मिसाल।

मीरा कान्हा की हुई, प्रेमिका इक बेहाल॥

बाँधे जब है द्रौपदी, कृष्ण को रक्षासूत्र।

कृष्ण सखा बन लाज रख, निभाया प्रेम-पवित्र॥

अर्जुन के बन सारथी, दिया धर्म का ज्ञान।

दूर किए संशय सब, गीता का वरदान॥

कर्म करो निष्काम तुम, यही कृष्ण का ज्ञान।

धर्म, प्रेम और सत्य से, ऊँचा हो इंसान॥

कान्हा केवल नाम ना, जीवन का आधार।

प्रेम बाँटकर जगत में, कर दो सुख-संसार॥

जन्माष्टमी के पर्व

पर, यही रहे अरमान।

हर मन में कृष्ण बसे, हर घर बने महान॥

डॉ. सत्यवान सौरभ

(डॉ. सत्यवान सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), एक कवि और सामाजिक विचारक है।)