{"vars":{"id": "128336:4984"}}

Monsoon Forecast: मानसून 2026 का पूर्वानुमान जारी, जाने कहां-कहां होगी बरसात और किन जगहों पर रहेगा सूखा ?

 

Monsoon Forecast: भारत की अग्रणी मौसम पूर्वानुमान और कृषि जोखिम समाधान कंपनी मौसम विभाग वेदर 2026 के मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार इस साल मानसून ‘सामान्य से कम’ रहेगा, यानी जून से सितंबर (4 महीने) के दौरान कुल बारिश लगभग 94% होगी। जबकि इन 4 महीनों में सामान्य औसत (LPA) 868.6 MM होता है। हालांकि, इसमें ±5% तक का अंतर हो सकता है। जिसका मतलब है कि जो भी पूर्वानुमान दिया गया है उसके 5 % तक ऊपर या नीचे जाने की संभावना होती है। मानसून “सामान्य से कम” होने का मतलब है कि बारिश 90% से 95% के बीच रह सकती है। गौरतलब है, मौसम विभाग ने जनवरी 2026 में भी कमजोर मानसून का संकेत दिया था और अब भी कंपनी ने अपनी उसी अनुमान को दोहराया है।

ला नीना खत्म, एल नीनो का असर बढ़ेगा – मानसून पर पड़ेगा प्रभाव

मौसम विभाग के एमडी जतिन सिंह के अनुसार, “डेढ़ साल तक चले ला-नीना (La Niña) के बाद अब प्रशांत महासागर की स्थिति सामान्य (ENSO-न्यूट्रल) होने के अनुकूल हो गई गई है। जिसका मतलब होता है, न अल-नीनो (El Niño) और न ला-नीना (La Niña) सक्रिय हैं, यानी समुद्र का तापमान सामान्य स्थिति में है। वहीं, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र और वातावरण के बीच तालमेल पहले से ज्यादा मजबूत हो गया है। लेकिन दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत में अल-नीनो (El Niño) बनने की संभावना है, जो साल 2026 के अंत तक और मजबूत हो सकता है। अल-नीनो के आने से मानसून कमजोर पड़ सकता है, खासकर सीजन के दूसरे हिस्से में बारिश का पैटर्न अनियमित और असंतुलित रहने की संभावना है।“

IOD से थोड़ी राहत, लेकिन बाद में जोखिम बना रहेगा

ENSO के अलावा, हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) भी मानसून को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। अगर Indian Ocean Dipole (IOD) मजबूत और सकारात्मक होता है, तो यह मानसून पर अल-नीनो के असर को कुछ हद तक कम कर सकता है। फिलहाल IOD के सामान्य या थोड़ा अधिक रहने की उम्मीद है, जिससे मानसून की शुरुआत ठीक हो सकती है। लेकिन सीजन के दूसरे हिस्से में बारिश कमजोर पड़ने का खतरा बना रहेगा और बारिश का वितरण असमान हो सकता है। जानकारी के लिए बता दें, Indian Ocean Dipole (IOD) एक मौसम से जुड़ी महत्वपूर्ण घटना है, जो हिंद महासागर के तापमान में बदलाव के कारण बनती है।

किन क्षेत्रों में कम और ज्यादा बारिश?

मौसम विभाग के अनुसार, मध्य और पश्चिम भारत के मुख्य वर्षा-आधारित (rainfed) क्षेत्रों में कम बारिश हो सकती है। अगस्त-सितंबर में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में सामान्य से कम बारिश रहने की संभावना है। वहीं, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत (जैसे बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय आदि) में बाकी हिस्सों की तुलना में बेहतर बारिश होने की उम्मीद है।

LPA (LPA) क्या होता है?

LPA (Long Period Average) का मतलब है किसी जगह की लगभग 30 साल की औसत बारिश। यह मानसून को समझने का एक मानक होता है, जिसके आधार पर तय किया जाता है कि साल का मानसून सामान्य, अच्छा या कमजोर है।

मौसम विभाग के अनुसार पूरे मानसून जून-जुलाई-अगस्त-सितंबर(JJAS)में बारिश की संभावना इस प्रकार है:

अधिकतम बारिश की 0% संभावना है (मौसमी वर्षा जो LPA के 110% से अधिक है)
सामान्य से अधिक बारिश की 10% संभावना है (मौसमी वर्षा जो LPA के 105% से 110% के बीच है)
सामान्य बारिश की 20% संभावना है (मौसमी वर्षा जो LPA के 96 से 104% के बीच है)
सामान्य से कम बारिश होने की 40% संभावना है (मौसमी वर्षा जो LPA के 90 से 95% के बीच है)
सूखे की संभावना 30% है (मौसमी वर्षा जो LPA के 90% से कम है)

मानसून 2026 के लिए मासिक आधार पर वर्षा का पूर्वानुमान इस प्रकार है:

जून में LPA के मुकाबले 101% बारिश हो सकती है (जून के लिए LPA = 165.3 MM)

सामान्य बारिश की संभावना 70% है
सामान्य से अधिक बारिश की संभावना 10% है
कम बारिश होने की संभावना 20% है

जुलाई में LPA के मुकाबले 95% बारिश हो सकती है( जुलाई के LPA = 280.5 MM)

सामान्य बारिश की 40% संभावना है
सामान्य से अधिक बारिश की 20% संभावना है
सामान्य से कम बारिश की 40% संभावना है

अगस्त में LPA के मुकाबले 92% बारिश हो सकती है।(अगस्त के लिए LPA = 254.9 MM)

सामान्य बारिश की 20% संभावना है
सामान्य से अधिक बारिश की 20% संभावना है
सामान्य से कम बारिश की 60% संभावना है

सितंबर में LPA के मुकाबले 89% बारिश हो सकती है।(सितंबर के लिए LPA = 167.9 MM)

सामान्य की बारिश की 20% संभावना है
सामान्य से अधिक बारिश की 10% संभावना है
सामान्य से कम बारिश की 70% संभावना है