राजस्थान, हरियाणा और पंजाब का मानसून 2026 विश्लेषण; इस बार सूखा रहेगा या आएगी बाढ़ ?
मानसून 2026: उत्तर-पश्चिम भारत के लिए विशेष मौसम पूर्वानुमान
विषय: अल नीनो (El Niño), +IOD और पश्चिमी विक्षोभ (WD) का त्रिकोणीय टकराव ।
2026 का मानसून उत्तर-पश्चिम भारत के किसानों और आम जनमानस के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है। वैश्विक मौसमी कारकों (Global Climate Drivers) का विश्लेषण करने पर निम्नलिखित प्रमुख बिंदु सामने आ रहे हैं:
1. अल नीनो (El Niño) का साया: शुष्क दौर की चेतावनी
इस साल मानसून के मध्य (जुलाई-अगस्त) में एक शक्तिशाली अल नीनो विकसित हो रहा है।
प्रभाव: इसके कारण उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून की "Break Monsoon" (लंबे शुष्क अंतराल) की स्थिति बार-बार बनेगी। जुलाई और अगस्त के दौरान कई दिनों तक बारिश न होने से तापमान में वृद्धि और उमस देखी जा सकती है।
खतरा: सामान्य मानसून की तुलना में इस क्षेत्र में कुल वर्षा 90-94% (LPA) के आसपास रहने का अनुमान है।
2. मैडन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) और मानसून की चाल
जून के शुरुआत में MJO हिंद महासागर में Phase 1-2 में रहेगा।
प्रभाव:
यह मानसून की शुरुआत (Onset) को गति देगा। जून के पहले और दूसरे पखवाड़े में उत्तर-पश्चिम भारत में प्री-मानसून और मानसून की शुरुआती बारिश अच्छी होने की संभावना है।
रणनीति:
किसानों को सलाह है कि जून की शुरुआत में मिलने वाली नमी का पूरा लाभ उठाएं, क्योंकि जुलाई में अल नीनो अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर देगा।
3. पश्चिमी विक्षोभ (WD) और मानसून का मिलन: 'सुपर-स्पेल' का खतरा
2026 में जेट स्ट्रीम के दक्षिण की ओर खिसकने के कारण
पश्चिमी विक्षोभ मानसून के दौरान भी सक्रिय रहेंगे।
अगर NINO 3.4 Index 1.5°C से ऊपर रहता है तो पश्चिमी विक्षोभ कमजोर मानसून की स्थिति से ज़ोरदार राहत प्रदान करेंगे।
टकराव:
जब बंगाल की खाड़ी की नमी (Monsoon Trough) और उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाएं (WD) आपस में मिलेंगी, तो राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश (Cloudburst events)हो सकती है।
अजीब स्थिति:
कुल बारिश कम होने के बावजूद, इन 2-3 बड़े 'स्पेल' के कारण अचानक बाढ़ (Flash Floods) जैसी स्थिति बन सकती है।
4. सकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुव (+IOD): एक रक्षक
मानसून के दूसरे भाग (अगस्त-सितंबर) में Positive IOD विकसित होने की प्रबल संभावना है।
राहत:
यह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक कम करेगा। यह अरब सागर से नमी की आपूर्ति बढ़ाएगा, जिससे अगस्त के अंत और सितंबर में मानसून की वापसी से पहले उत्तर-पश्चिम भारत में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।
निष्कर्ष और अपडेट के मुख्य बिंदु:
जून 2026 समय पर या जल्दी आगमन, अच्छी बारिश ,बुवाई के लिए अनुकूल समय।
जुलाई 2026 अल नीनो के कारण लंबा शुष्क अंतराल (Dry Spell) सिंचाई का प्रबंधन तैयार रखें।
अगस्त 2026 WD और मानसून का टकराव, अचानक भारी बारिश जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखें।
+IOD के प्रभाव से सक्रिय मानसून की वापसी | फसलों की कटाई के समय सावधानी। |
इस साल हमें केवल बारिश के आंकड़ों पर नहीं, बल्कि WD की ट्रैकिंग पर अधिक ध्यान देना होगा।विंड चार्ट पर जब भी कोई ट्रफ (Trough) अफगानिस्तान से भारत की ओर बढ़ेगा, वह उत्तर-पश्चिम भारत के लिए "Red Alert" साबित हो सकता है।