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भिवानी में दिखी 70 के दशक के हरियाणा की झलक

 

 भिवानी: हरियाणा की विरासत और संस्कृति को जिंदा रखने के लिए भिवानी में सर्च कल्याण मंच की ओर से एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। इस प्रदर्शनी में 70 के दशक के हरियाणा की झलक देखने को मिल रही है। सर्व कल्याण मंच हरियाणा की ओर से यह प्रदर्शनी भिवानी के पुर गांव में लगाई गई है। इसमें हरियाणा के पुराने सामान की स्टॉल लगाई गई है। स्टॉल लगाने वाले हरियाणा के पारंपरिक परिधान (पुरुष- धोती कुर्ता और महिलाएं दामन) में दिखे। इसके साथ ही बैलगाड़ी से लेकर खेत जोतने का हल भी इस प्रदर्शनी में देखने को मिला। इसमें भारतीय करेंसी का इतिहास भी इस मेले में दिखा। आधुनिक पीढ़ी ने इस मेले को काफी उत्सुकता के साथ देखा।

प्रदर्शनी देखने आए लोगों ने ना केवल प्रदर्शनी का अवलोकन किया, बल्कि ठेठ हरियाणवी परिधानों व हरियाणवी वाद्य यंत्रों का लुत्फ उठाया। हरियाणवी कलाकारों ने इस प्रदर्शनी में दर्शकों का मन मोह लिया। इस प्रदर्शनी में पुराने समय में प्रयोग होने वाली करेंसी, पुराने समय में प्रयोग होने वाले मापतोल के उपकरण, रसोई में प्रयोग होने वाले चीनी मिट्टी के बर्तन प्रदर्शित किए गए। इस प्रदर्शनी में टोकनी, लालटेन, कृषि में प्रयोग होने वाले यंत्र, रेहडू, पुरातन हल, गोपियां, फाली, दीवे, कढ़ावनी, रई, बिलौना जैसे पुरातन हरियाणवी वस्तुएं देखने को मिली। इन सामानों को देखकर पुराने समय के लोगों ने अपने बचपन व जवानी को याद किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने बचपन व अपनी जवानी में इन उपकरणों व साधनों का प्रयोग किया है। आज ये आधुनिकता की दौड़ में उतने उपयोगी नहीं रहे है. लेकिन ठेठ हरियाणवी संस्कृति व हरियाणवी ग्रामीण जीवन को दर्शाते हैं कि किस प्रकार से हरियाणवी लोग सरलता से कम साधनों में अपना जीवन गुजारते थे।

हरियाणवी वाद्य यंत्रों जैसे इकतारा, तुम्बा, ढोल, ढहरू, ढफली, बीण व ठेठ हरियाणवी परिधान धोती, कुर्ता, दामन, गोटेदार चुनड़ी, पगड़ी, लहंगा में कलाकारों ने आगंतुकों का स्वाागत किया तथा वाद्य यंत्रों के साथ हरियाणवी संस्कृति से जुड़े संगीत भी का प्रदर्शन किया।